फ़रवरी 8, 2023 6:54 पूर्वाह्न

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सपा का राष्ट्रीय अधिवेशन आज, पिता के बाद पुत्र को फिर मिली कमान

मुलायम सिंह, जनेश्वर मिश्र, बेनी प्रसाद वर्मा और किरणमय नंदा जैसे लोगों ने समाजवादी पार्टी की स्थापना जनता दल के कई हिस्सों में टूटने के बाद की थी। इसकी स्थापना अक्टूबर 1992 में हुई थी। पार्टी के सर्वेसर्वा तब से ही मुलायम सिंह रहे हैं।

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उत्तर प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है। लखनऊ के रमा बाई अम्बेडकर पार्क में आयोजित इस सम्मलेन में अखिलेश यादव को एक बार फिर से सपा का सुप्रीमो यानी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।

पार्टी के महासचिव और अखिलेश यादव के चाचा रामगोपाल यादव ने अखिलेश यादव के तीसरी बार विधिवत राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा की।

पहली बार जनवरी 2017 में तब तक मुलायम सिंह यादव की मातहती में रही सपा की कमान को अखिलेश यादव ने कई दिन तक लखनऊ में चले ड्रामे के बाद हथियाया था। पार्टी में हुए इस फेरबदल ने मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच की दूरियों को भी दुनिया के सामने ला दिया था।

इससे पहले 28 सितम्बर को हुए सपा के प्रांतीय अधिवेशन में सपा के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल को अखिलेश के वरदहस्त के कारण फिर से उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष की कुर्सी मिल गई। सपा के अंदर से इस कारण काफी रोष की भी खबर है।

मुलायम ने बनाई पार्टी, वही किए गए साइडलाइन

मुलायम सिंह, जनेश्वर मिश्र, बेनी प्रसाद वर्मा और किरणमय नंदा जैसे लोगों ने समाजवादी पार्टी की स्थापना जनता दल के कई हिस्सों में टूटने के बाद की थी। इसकी स्थापना अक्टूबर 1992 में हुई थी। पार्टी के सर्वेसर्वा तब से ही मुलायम सिंह रहे हैं।

समाजवादी पार्टी का नवम्बर 1992 में आयोजित पहला अधिवेशन साभार: समाजवादी पार्टी

राज्य में मुस्लिम – यादव समीकरण और सामाजिक इंजीनियरिंग के बलबूते सपा कई बार प्रदेश की सत्ता में रही। पार्टी से मुलायम सिंह 1993, 1996 और 2003 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद जब सपा 2012 में स्पष्ट बहुमत के साथ वापस उत्तर प्रदेश की सत्ता में आई तो मुलायम सिंह ने अपने पुत्र अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाया।

हालांकि, सिर्फ मुख्यमंत्री बनकर ही अखिलेश के अरमान नहीं रुके और उन्होंने अपने पिता की गैरमौजूदगी में 2017 में कई दिन तक चले एक सियासी ड्रामे में खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करवा लिया। इसके पीछे अखिलेश के चाचा रामगोपाल का दिमाग माना जाता है।

अखिलेश पार्टी में शिवपाल यादव को बड़ा ओहदा देने के खिलाफ थे और खुद की सरकार को लगातार साढ़े चार मुख्मंत्री वाली सरकार कहे जाने की आलोचना सुन रहे थे। शिवपाल यादव को साइडलाइन करने के लिए उन्होंने पार्टी की पूरी कमान हथिया ली।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अखिलेश यादव की सार्वजनिक तौर से आलोचना मुलायम सिंह ने की थी। परिवार में ही हुए इस गद्दी के उठापटक के कारण मुलायम सिंह और अखिलेश के बीच की दूरियां काफी बढ़ गईं थी। मुलायम नहीं चाहते थे कि शिवपाल को इस तरह से पार्टी से दूर किया जाए।

हालांकि, अखिलेश ने सिर्फ शिवपाल और उनके करीबियों को ही नहीं बल्कि अपने पिता मुलायम सिंह को भी संस्थापक का दर्जा देकर किनारे कर दिया था। इन सब ड्रामे के बाद से अभी तक पार्टी और यादव परिवार में चीजें सामान्य तौर पर नहीं वापस आ सकी हैं।

लड़ाई परिवार की, जी हजूरी कार्यकर्ताओं की

राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद के लिए भले ही परिवार में आपसी लड़ाई हुई हो, लेकिन समाजवादी पार्टी देश में परिवारवादी राजनीति के आखिरी किलों में से एक है। पार्टी के सामान्य कार्यकर्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से काफी दूर हैं।

सपा की स्थापना के बाद से लगातार मुलायम और अखिलेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बने रहे हैं। (समाजवादी पार्टी ट्विटर)

पहले 25 सालों तक मुलायम सिंह के सर्वेसर्वा रहने के बाद अब उनके पुत्र ने पार्टी की कमान सम्भाली हुई है। पद के इस हस्तांतरण से परिवार में भले ही कुछ विवाद हुए हों, कार्यकर्ता के नसीब में कोई बदलाव नहीं आया है। परिवार में ही एक हाथ से दूसरे हाथ के बीच जाते अध्यक्ष पद में परिवारवादी राजनीति की दीवाल में और और मजबूती ला दी है।

पार्टी ने बताया निर्वाचन, भाजपा ने कहा परिवार की जागीर है पार्टी

पार्टी ने अखिलेश यादव को पुनः अध्यक्ष बनाने के फैसले को निर्वाचन का नाम दिया है, वह बात अलग है कि अखिलेश के सामने कोई खड़ा ही नहीं था। इस तरह से अखिलेश यादव का लगातार तीसरी बार अध्यक्ष बनना निर्वाचन के बजाए स्वयं की नियुक्ति के रूप में अधिक देखा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या ने अखिलेश यादव के तीसरी बार पार्टी के अध्यक्ष बनने पर यादव परिवार पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया है कि “समाजवादी पार्टी कोई राजनीतिक पार्टी ही नहीं, बल्कि एक खास परिवार की जागीर है जिसके मुखिया श्री अखिलेश यादव जी हैं। चुनाव तो केवल दिखावा है।”

लगातार उत्तर प्रदेश में मिली हार के कारण पार्टी अब 2024 के लोकसभा चुनावों के जरिए आक्सीजन खोजने में जुटी है, पार्टी में नए सिरे यह सब अधिवेशन और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन फिर से चालू करना इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।

Arpit Tripathi
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अवधी, पूरब से पश्चिम और फिर उत्तर के पहाड़ ठिकाना है मेरा

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