सितम्बर 27, 2022 6:00 पूर्वाह्न

Category

दुनिया के प्राचीन मंदिर, जो भारत में नहीं हैं

प्राचीन काल से, विश्व में कई मंदिरों का निर्माण हुआ है जिन्हें प्राचीन सभ्यता की सबसे महान कृतियों में से एक माना जाता है।
प्राचीन मंदिर उन रहस्यों को अपने आप में समेटे रखते हैं जिन्हें अभी तक कोई जान नहीं पाया है।

1465
2min Read
प्राचीन मंदिर Ancient Temples

प्राचीन काल से, विश्व में कई मंदिरों का निर्माण हुआ है जिन्हें प्राचीन सभ्यता की सबसे महान कृतियों में से एक माना जाता है। इनमें से कुछ का निर्माण राजवंशों द्वारा किया गया था, उनके निर्माण के अपने कारण थे, जबकि कुछ प्राचीन मंदिर आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए समाज द्वारा बनाए गए थे। इसके अलावा, इनमें से कुछ प्राचीन मंदिरों के बारे में माना जाता है कि वे उन रहस्यों को अपने आप में समेटे रखते हैं जिन्हें अभी तक कोई जान नहीं पाया है, और कुछ इतने प्राचीन हैं कि उनके केवल एक बार दर्शन करने से न केवल हमारी आत्मा समृद्ध हो जाती है, बल्कि एक नया दृष्टिकोण भी मिलता है

आइए, उनमें से कुछ मंदिरों के बारे में आपको बताते हैं।

अमादा का मंदिर, मिस्र

15 वीं शताब्दी में मिस्र के फिरौन थुटमोस III द्वारा निर्मित, यह नूबिया, मिस्र के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। यह एक महान ऐतिहासिक महत्व का मंदिर है और इसके अंदरूनी हिस्सों पर महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शिलालेख खुदे हुए हैं। यदि इन अभिलेखों को पढ़ा जाए, तो पता चलता है कि इस मंदिर में सदियों से बहुत सारे परिवर्तन और जीर्णोद्धार हुए हैं। मिस्र के 19वें राजवंश के दृश्यों और मिस्र के इतिहास को दर्शाने वाली तस्वीरों को इस मंदिर की दीवारों पर देखा जा सकता है। यदि आपको मिस्र की यात्रा करनी है तो इस मंदिर में अवश्य जाना चाहिए।

हाइपोगियम का हाल सफलीनी

यूरोप के माल्टा में स्थित हाइपोगियम मंदिर का निर्माण लगभग 2500 ईसा पूर्व किया गया था। यह भूमिगत रूप से बनाया गया था और वर्तमान में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों में से एक है। मंदिर में विशाल हॉलवे, गुप्त कक्ष, संकीर्ण मार्ग, विशाल नकली खिड़कियां, सजावटी द्वार, लाल भित्तिचित्र चित्र और पाषाण की नक्काशीदार छत शामिल हैं। यह मंदिर 1902 में खोजा गया था और 1990 में बंद कर दिया गया था। इस मंदिर के विभिन्न स्तरों को अलग-अलग सदियों में अलग अलग राजाओं द्वारा बनाया गया था। निचला स्तर 2500 ईसा पूर्व में बनाया गया था, जबकि केन्द्रीय स्तर 3000 ईसा पूर्व में बनाया गया था, और शीर्ष स्तर 3600 ईसा पूर्व में बनाया गया था। आज, यह मंदिर प्रतिदिन सीमित पर्यटकों के लिए ही खुलता है।

स्टोनहेंज, इंग्लैंड

दक्षिण पश्चिम इंग्लैंड में स्थित, स्टोनहेंज को 3000 ईसा पूर्व में बनाया गया था। यह दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। इसके बारे में दिलचस्प तथ्य यह है कि यह एक ऐसी संस्कृति द्वारा बनाया गया था जिसका इतिहास में आज तक कोई लिखित प्रमाण नहीं है। इस मंदिर की विभिन्न विशेषताएं दुनिया भर में बहस का विषय हैं। इसकी संरचना को इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रमुख उपलब्धियों में से एक माना जाता है। इस मंदिर में पृथ्वी के सबसे प्राचीन देवताओं की पूजा की जाती थी और यूनेस्को ने इसे 1986 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।

अपोलो का मंदिर, ग्रीस

यूनानी क्षेत्र के मध्य में स्थित, अपोलो का मंदिर ग्रीस के डेल्फी में स्थित है, और इसका निर्माण 330 ईसा पूर्व में किया गया था। स्पिंथरस, जेनोडोरोस और एजथॉन द्वारा निर्मित यह मंदिर एक भूकंप में नष्ट हो गया था और 373 ईसा पूर्व में फिर से बनाया गया था। इस मंदिर के अधिकांश आंतरिक भाग अभी तक खोजे नहीं जा सके हैं। इस मंदिर का मुख्य आकर्षण अंदर बने अपोलो के चार घोड़े हैं। ध्यान दें कि इस प्राचीन मंदिर के विभिन्न खंडों की खोज की जानी बाकी है।

सेती प्रथम का मंदिर

यह मंदिर मिस्र के 19 वें राजवंश के काल का है और इसे मिस्र के राजा सेती प्रथम और उनके पुत्र रामसीस द्वितीय ने बनवाया था। एबाइडोस में नील नदी के तट पर स्थित इस संरचना का निर्माण राजा सेती ने शुरू किया था, लेकिन 1297 ईसा पूर्व में उनकी मृत्यु के बाद, उनके पुत्र रामसी ने इसका निर्माण पूरा किया। यह मंदिर दुनिया के कई देवताओं को समर्पित था। इसे प्राचीन मिस्र के महत्वपूर्ण स्थलों में से एक माना जाता है, इस मंदिर का डिजाइन एक एल-आकार की संरचना है। इसे चूना पत्थर और बलुआ पत्थर से बनाया गया था। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, प्रसिद्ध ‘अबीडोस किंग लिस्ट’ भी मंदिर के अंदर ही कहीं पर स्थित है।

गोबेकली टेपे, तुर्की

स्टोनहेंज मंदिर से 6000 साल पहले बना यह मंदिर तुर्की में स्थित है। इसे दक्षिण-पूर्वी तुर्की के प्रागैतिहासिक लोगों का एक उल्लेखनीय अविष्कार माना जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर को जानबूझकर 8000 ईसा पूर्व में दफना दिया गया था और 2008 में जर्मन पुरातत्वविद् क्लॉस श्मिट ने इसकी दुबारा खोज की थी। इसमें चूना पत्थर से बने कई टी-आकार के स्तंभ शामिल हैं। गोबेकली टेप का निर्माण पहिये के आविष्कार और कृषि की शुरुआत से भी पहले किया गया था।

(इनमें से कुछ जानकारी TOI से साभार है)

ज्यादातर ज्योतिर्लिंग मन्दिरों पर विदेशियों ने किए थे हमले

देश-विदेश से एक के बाद एक मिल रहीं प्राचीन भारतीय मूर्तियाँ

The Indian Affairs Staff
The Indian Affairs Staff
All Posts

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

Recent Posts

Popular Posts

Video Posts