सितम्बर 26, 2022 4:33 अपराह्न

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शी जिनपिंग की बढ़ेगी मुसीबत

कार्यकाल विस्तार के बाद चीन में शी जिनपिंग का प्रभुत्व कई गुना बढ़ जाएगा, लेकिन इसके बावजूद उनके सामने कई समस्यों से पार पाने की चुनौती होगी। उनके सामने पहली चुनौती जीरो कोविड पॉलिसी का मूल्यांकन की होगी।

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चीन राष्ट्रपति शी जिनपिंग

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चीन की छवि अक्सर एक विकासवाहक और स्थिर राष्ट्र की तरह पेश की जाती है। आज हम आपको बताएंगे कि तत्कालीन हालातों के हिसाब से यह बात कैसे झूठ साबित हो रही है।

जिनपिंग का तीसरा कार्यकाल?

चीनी राज्य मीडिया के अनुसार कम्युनिस्ट पार्टी ने 16 अक्टूबर से कांग्रेस की शुरुआत का फैसला लिया है। यह तक़रीबन तय माना जा रहा है कि इस कांग्रेस में राष्ट्रपति शी जिनपिंग का कार्यकाल बढ़ा दिया जाएगा, जो इनका तीसरा कार्यकाल होगा।

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और वहां की राजनीति में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मजबूत पकड़ है। कई राजनीतिज्ञों के अनुसार, चीनी राजनीति में शी जिनपिंग अक्सर खुद को माओ के समकक्ष स्थापित करने के प्रयासरत रहें हैं।

कार्यकाल विस्तार के बाद चीन में शी जिनपिंग का प्रभुत्व कई गुना बढ़ जाएगा, लेकिन इसके बावजूद उनके सामने कई समस्यों से पार पाने की चुनौती होगी। उनके सामने पहली चुनौती जीरो कोविड पॉलिसी का मूल्यांकन की होगी। 

जीरो कोविड पॉलिसी

कोविड महामारी के दौरान कई देशों द्वारा जीरो कोविड पॉलिसी अपनाई गई थी। इसके तहत नागरिक जीवन पर पूर्ण नियंत्रण और लॉकडाउन जैसे कदम उठाना था। दूसरी और तीसरी कोविड लहर के बाद कई देशों ने यह व्यवस्था हटा दी थी, लेकिन एकमात्र चीन अभी भी इसका पालन कर रहा है। 

चीन के कई शहरों में लॉकडाउन लगा हुआ है। खबरों के अनुसार, चीनी नागरिक जीरो कोविड पॉलिसी से बहुत परेशान और आक्रोशित हैं। जीरो कोविड पॉलिसी का असर चीन की अर्थव्यवस्था पर भी प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। 

प्रॉपर्टी सेक्टर हुआ धड़ाम

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन, अपने प्रॉपर्टी सेक्टर में एक बड़े संकट का सामना कर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार रियल एस्टेट सेक्टर चीनी अर्थव्यवस्था में 29% का योगदान देता है।

चीनी बिल्डरों पर अक्सर आरोप लगते रहें हैं कि वे अत्यधिक लेनदारी करते हैं लेकिन समय पर ग्राहकों को घर नहीं मिल रहे हैं। चीन में घर खरीदारों भी अब बाकी की देनदारी से मना कर रहें हैं।

यह सेक्टर चीनी सरकार के नीतियों से पहले ही परेशान था। साल 2020 में जिनपिंग सरकार के द्वारा “तीन लाल रेखाएं” नीति लाई गई थी जिसका उद्देश्य चीनी बिल्डरों की लेनदारी को नियंत्रित करना था। नई नीति से कई सारे बिल्डर धन-रहित हो गए जिससे इस सेक्टर पर काफी नकारात्मक प्रभाव हुआ। 

बैंक सेक्टर पर असर 

52 ट्रिलियन डॉलर क बैंकिंग उद्योग के लिए यह वर्ष कठिन साबित हो रहा है। चीन के बैंकिंग उद्योग, जिसे कम्युनिस्ट सरकार द्वारा कम दरों पर अधिक उधार देने के लिए कहा जा रहा है– रिकॉर्ड 2.95 ट्रिलियन युआन बैड लोन की खबर दे रहा है। 

चीनी बैंको का बुरा हाल इसीलिए भी है क्योंकि रियल एस्टेट का सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव सबसे ज्यादा बैंकिंग सेक्टर पर ही दिखता है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस बैंकिंग समस्या से कैसे निपटते हैं यह देखने लायक नजारा होगा। 

ताइवान मुद्दा

बीते गुरूवार को ताइवान की सेना ने एक अज्ञात नागरिक ड्रोन को मार गिराया। यह ड्रोन ताइपे के सबसे छोटे द्वीपों में से एक पर उड़ान भरकर, ताइवान के हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर गया, जो मुख्य भूमि चीन से सिर्फ दो मील की दूरी पर स्थित है।

यह मामला तब आया है जब ताइवान और चीन के बीच यूएस कांग्रेस स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइपे दौरे से तनाव बढ़ा है। चीन की कम्युनिस्ट सरकार के लिए ताइवान मुद्दा, आत्म-सम्मान का मामला है और इस पर यूएस के हस्तक्षेप से वह बहुत चिढ़ा है। 

कम्युनिस्ट सरकार और राष्ट्रपति शी जिनपिंग एशिया समेत पूरी दुनिया में अपनी प्रतिष्ठा और प्रभाव बढ़ाने के सपने देखते हैं, लेकिन इससे पहले उन्हें अपने देश के हालातों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। 

The Indian Affairs Staff
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