सितम्बर 27, 2022 6:39 पूर्वाह्न

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“गाय पूजने ने मदद नहीं की”: बुद्धिजीवियों और पत्रकारों का ऋषि सुनक पर हिंदूफोबिक तंज

भारत में ऋषि सुनक के हार जाने से तथाकथित बुद्धिजीवी और वामपंथी पत्रकार बहुत खुश हैं

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ऋषि सुनक

ब्रिटैन में लिज ट्रस भारतवंशी ऋषि सुनक को हरा कर देश की नई प्रधानमंत्री बन गईं हैं। भारत में ऋषि सुनक के हार जाने से यहाँ की जनता में कोई विशेष दुख नहीं है लेकिन कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी और वामपंथी पत्रकार बहुत खुश हैं। 

ऋषि सुनक की हार में ये खास लोग इतना खोए हैं कि ट्विटर पर हिन्दुओं के लिए विवादित टिप्पणी कर डाली। 

ऋषि सुनक ने किया था गाय-पूजन

एक हफ्ते पहले ऋषि सुनक अपनी पत्नी अक्षता मूर्ति के साथ लंदन के एक मंदिर में दर्शन करने गए थे। सोशल मीडिया में एक वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें ऋषि सुनक गाय की आरती कर रहे थे। 

भारत और दुनिया भर से हिन्दुओं ने सोशल मीडिया पर ऋषि सुनक के इस वीडियो की तारीफ में कई पोस्ट डाले। 

गाय पूजने पर मजाक

ऋषि सुनक के हार जाने पर सोशल मीडिया में कई लोगों ने गाय पूजने की याद दिलाते हुए मजाक उड़ाया। तथाकथित प्रोफेसर अशोक स्वैन ने ट्विटर पर यूके की बात करते हुए यूपी को बदनाम करने का प्रयास किया।

उन्होंने लिखा, “ऋषि सुनक की तमाम हरकतों (गाय-पूजन) के बाद भी वह लिज ट्रस से हार गए। यूके आखिर यूपी नहीं है।”

अशोक स्वैन का ट्वीट

‘तमाम हरकतों’ में गौ-पूजन कैसे शामिल होता है, यह तर्क संसार से परे है। 

यह लिस्ट अभी केवल शुरू ही हो रही है। प्रोपोगेंडा पोर्टल ‘स्क्रोल’ की पत्रकार तारु भाटिया ने ट्विटर पर लिखा, “गौ-पूजन ने मदद नहीं की।”

तारु भाटिया का ट्वीट

तारु भाटिया, स्क्रॉल में ऑडियंस एडिटर के पद पर हैं, वही स्क्रॉल जो वामपंथी प्रोपगेंडा फैलाने के लिए मशहूर है। 

प्रियदर्शिनी तेलांग ने ट्विटर पर लिखते हुए मर्यादा की ऐसी धज्जियाँ उड़ाई कि गली-मोहल्ले के लफंगे भी शर्म से पानी-पानी हो जाएं। उन्होंने लिखा कि गोबर खाने वाले और गोमूत्र पीने वाले यूके के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। 

प्रियदर्शिनी तेलांग का ट्वीट

असभ्य से प्रतीत हो रहे प्रियदर्शिनी तेलांग ट्विटर पर खुद को रिसर्चर और मानवाधिकार एडवोकेट बताते हैं। 

आखिर हिंदुओं की श्रद्धा ही निशाने पर क्यों?

हिन्दुओं के लिए गाय माता समान है। हिन्दुओं की गाय के प्रति श्रद्धा का मजाक उड़ाना एक नया ट्रेंड बनता जा रहा है। दूसरे धर्म की निंदा करने में ‘सर तन से जुदा’ की धमकी मिलती है। क्या इन तथाकथित बुद्धजीवियों पर कोई कार्रवाई होगी या फिर एक बार सिर्फ ट्विटर तक आक्रोश सीमित रह जायेगा?

The Indian Affairs Staff
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