सितम्बर 27, 2022 8:14 पूर्वाह्न

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19 साल पुराने मामले में गैंगस्टर मुख्तार अंसारी को 7 साल की सजा, जानिए अपराध का इतिहास

इलाहबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच ने एक 19 साल पुराने मामले में मुख्तार अंसारी को 7 वर्ष की सजा सुनाई है। 40 साल के लंबे आपराधिक रिकॉर्ड के बाद ये पहली बार है जब माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को सजा सुनाई गई है।

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19 साल पुराने मामले में मुख्तार अंसारी को 7 साल की सजा, जानें आपराधिक कुंडली

इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को साल 2003 के एक मामले में 7 वर्ष की सजा सुनाई है। वर्ष 2003 में लखनऊ जेल में कैद मुख्तार पर तत्कालीन जेलर को धमकाने और उस पर पिस्टल तानने का आरोप था।

19 वर्ष बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर अंसारी को IPC धारा 353 में 2 साल की सजा और 10,000 रुपए जुर्माना, धारा 504 में 2 साल की सजा और 2 ,000 रुपए जुर्माना और धारा 506 के तहत 7 साल की सजा और 25000 का जुर्माना लगाया है।

क्या था मामला

वर्ष 2003 में मुख्तार अंसारी लखनऊ की जिला जेल में सजा काट रहा था उस वक्त जेलर के पद पर एसके अवस्थी तैनात थे। 24 अप्रैल 2003 की सुबह कुछ लोग मुख्तार अंसारी से मिलने जेल आए थे, जिसके लिए अंसारी जेलर के कमरे में आया था।

  • जेलर एसके अवस्थी ने आने वाले लोगों की तलाशी के आदेश दिए, जिस पर मुख्तार भड़क उठा और धमकी देने लगा
  • एसके अंसारी द्वारा तलाशी पर जोर देने पर मुख्तार ने धमकी दी, “आज तुम जेल से बाहर निकलो..तुम्हें मरवा दूंगा”

धमकी देने के बाद मुख्तार ने उससे मिलने आए व्यक्ति से रिवॉल्वर छीन कर जेलर पर तान दी थी। हालाँकि, आस-पास खड़े पुलिसकर्मियों ने मुख्तार को पकड़ लिया, जिससे कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। अदालत में दर्ज बयानों के अनुसार, मुख्तार ने जेलर को खुली धमकी भी दी थी कि ‘अब तुम्हारे दिन खत्म हो गए हैं, तुम्हें कोई नहीं बचा सकता’।

घटना के समय एसके अवस्थी और मुख्तार के साथ कक्ष में डिप्टी जेलर सर्वेश विक्रम सिंह, डिप्टी जेलर शेलेंद्र प्रताप सिंह, गेटकीपर प्रेम चंद्र मौर्या, IW रुद्र बिहारी श्रीवास्तव और IW रामस्वरूप पाल उपस्थित थे।

एसके अवस्थी ने 28 अप्रैल, 2003 में आलमबाग पुलिस स्टेशन में मुख्तार अंसारी के खिलाफ IPC की धारा 353, 504, 506 में मामला दर्ज करवाया था। मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादी की ओर से किसी गवाह की पूछताछ नहीं कि गई, जिसके बाद निचली अदालत ने मामला बंद कर दिया था।

वर्ष 2003 में निचली अदालत द्वारा मामला रद्द होने का एक कारण गवाहों द्वारा अपने बयानों से मुकरना भी रहा। जहाँ एसके अवस्थी के अनुसार घटना के समय ज्यादातर गवाह मौजूद थे। हालाँकि, कोर्ट में कई जेलकर्मी इस बयान से मुकर गए।

डिप्टी जेलर शेलेंद्र प्रताप के अनुसार वो उस दिन जेल में ही थे, जब किसी ने बताया कि मुख्तार अंसारी और जेलर के बीच कोई विवाद हो गया है। वो जब तक जेलर के कमरे में पहुँचे तब तक मुख्तार बाहर आ गया था और एसके अवस्थी अंदर बैठे थे।

वहीं, जेल वार्डर रामस्वरूप पाल ने भी कहा कि एसके अवस्थी के कमरे और उनके कमरे के बीच करीब 500 मीटर की दूरी है। रामस्वरूप द्वारा इस बात का भी दावा किया गया कि मुख्तार अंसारी ने ना तो जेलर को धमकाया और ना ही जान से मारने की धमकी दी।

हालाँकि, जब उनसे सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज बयानों का हवाला दिया गया तो उन्होंने इससे इंकार कर दिया और कहा कि उसने दबाव में आकर कोई बयान नहीं दिया है। गवाहों के कोर्ट में पलटने से एसके अवस्थी 2020 में केस हार गए थे, जिसके बाद मुख्तार अंसारी जेल से बरी हो गया। हालाँकि, एक अन्य मामले में अंसारी फिलहाल बांदा जेल में सजा काट रहा है।

लखनऊ बेंच के जस्टिस दिनेश कुमार सिंह ने राज्य सरकार की अपील पर एक बार फिर मामले की सुनवाई की, जिसमें मुख्तार अंसारी को दोषी करार दिया गया है। हाईकोर्ट के अनुसार, सबूतों के मूल्यांकन में निचली अदालत से गलती हुई है।

मुख्तार अंसारी और अपराधों का इतिहास

मुख्तार अंसारी पर 50 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। लेकिन, इनमें सबसे बड़े दो मामले सामने आते हैं, जिनमें एक मामला बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या का था तो दूसरा अवधेश राय हत्याकांड।

गाजीपुर या कृष्णानंद राय हत्याकांड

29 नवंबर, 2005 के दिन मोहम्मदाबाद से तत्कालीन बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय सहित 7 लोगों को चुनावी रंजिश के चलते गोलियों से भून दिया गया था। घटना के दौरान बीजेपी विधायक स्थानीय क्रिकेट प्रतियोगिता में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने गए थे। घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उन पर एके-47 से 500 राउंड फायर किए थे, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

वर्ष 2002 में मोहम्मदााबाद विधानसभा सीट पर हुए चुनावों में कृष्णानंद राय ने मुख्तार अंसारी के भाई अफजल अंसारी को हराकर जीत हासिल की थी। हत्याकांड के समय भी मुख्तार जेल में था लेकिन, सारे विवाद से उसका नाम जुड़ा हुआ सामने आ रहा था।

मुलायम सिंह यादव की सरकार के दौरान हुई घटना के बाद क्षेत्र में दंगे भी भड़के थे और गंभीरता को देखते हुए इसकी जाँच सीबीआई को सौंपी गई। हालाँकि, सीबीआई कोर्ट ने मामले के सभी आरोपितों को बरी कर दिया था, जिनमें अफजल अंसारी, संजीव माहेश्वरी, एजाज उल हक, रामू मल्लाह, मंसूर अंसारी, राकेश पांडे और शार्प शूटर मुन्ना बजरंगी शामिल थे।

मुख्तार अंसारी

मुख्तार अंसारी कभी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में बड़ा नाम हुआ करता था। समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान इसकी गुंडई को राज्य में पनपने का मौका मिला। वर्ष 2005 के मऊ दंगों में मुख्तार अंसारी पर मजहब विशेष के लोगों को भड़काकर दंगे भड़काने का आरोप लगा था।

वर्ष 2006 में वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंसारी को खुली चुनौती दी, जिसके 3 साल बाद आजमगढ़ जाते हुए उनके काफिले पर हमला भी और आगजनी की गई थी। हमले में जान बचने के बाद योगी आदित्यनाथ ने मुख्तार को चेतावनी दी थी और मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही ऐसे अपराधियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई भी की गई।

अवधेश राय हत्याकांड

वर्ष 1991 में वाराणसी के चेतगंज इलाके में कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय के छोटे भाई अवधेश राय की हत्या की गई थी। अजय राय ने दावा किया था कि मुख्तार के सिर पर सरकार का हाथ है। अजय राय इस प्रकरण में वादी के साथ चश्मदीद भी थे और उनके बयान के अनुसार, 3 अगस्त 1991 को घर के बाहर एक वैन आई थी, जिसमें मुख्तार अंसारी के साथ उसके साथी मौजूद थे। सभी अपराधियों ने वैन से उतरकर अवधेश पर गोलीबारी की थी।

अगर मुख्तार अंसारी को राजनीतिक समर्थन नहीं रहा तो यह सवाल खड़ा होता है कि हाई प्रोफाइल मामलों सहित इतने आपराधिक मुकदमों में भी कभी अंसारी को सजा क्यों नहीं सुनाई गई?

योगी सरकार के दौरान भी मुख्तार ने बचने के कई रास्ते अपनाए थे। योगी सरकार ने आते ही कई बेनामी संपत्तियों और अवैध निर्माण पर कार्रवाई शुरू कर दी थी। इस दौरान यूपी पुलिस से बचने के लिए मुख्तार पंजाब जेल में बंद रहा था और 2 साल में यूपी पुलिस की टीम ने मुख्तार को लाने के लिए 8 बार पंजाब गई थी।

जनवरी, 2019 में बड़े बिल्डर की शिकायत पर 10 करोड़ की फिरौती मांगने के संबंध में पंजाब पुलिस ने मुख्तार के खिलाफ मामला दर्ज कर जेल भेज दिया था। यूपी पुलिस द्वारा इसमें कई प्रयास किए गए, यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में कहा था कि मुख्तार को यूपी पुलिस को सौंपा जाना चाहिए। लेकिन, सियासी रसूख के आगे कोर्ट के आदेश की भी पालना नहीं की गई।

भू-माफिया मुख्तार अंसारी पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शिकंजा कसते हुए जेल में डाला था। साथ ही, अंसारी और उसके सहयोगियों की 4 करोड़ रुपए तक की संपत्ति भी कुर्क की थी। अंसारी माफिया डॉन के रूप में जाना जाता है, जिस पर 50 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज हैं।

माफिया अंसारी के खिलाफ गाजीपुर के मोहम्मदाबाद में IPC की धारा 493/05 302, 506, 120B में मामला दर्ज है जो कि हत्या करने, आपराधिक धमकी और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित है।

भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत अंसारी के खिलाफ 589/05 302, 506, 504, 120B में मामला दर्ज है जो कि हत्या, आपराधिक धमकी, शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना आता है।

FIR की प्रति

गाजीपुर के अलग-अलग हिस्सों में मुख्तार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 467,468, 420, 147, 323, 136(2), 130, 135, 136(1), पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट और 384 धारा में मामले दर्ज हैं। ये सभी धाराएं आपराधिक और गैंगेस्टर धाराओं से संबंधित हैं।

धारा 307, 3(1) उप्र गैंगेस्टर एक्ट, आईपीसी की धारा 120 और 7 सीएल एक्ट, 143,148,149 और 307 की धाराएं भी माफिया अंसारी पर लगी हुई हैं। कोटवाली में एनएसए एक्ट और आर्म्स एक्ट के अंदर भी अंसारी पर केस चल रहे हैं।

वाराणसी की बात करें तो यहां अंसारी के खिलाफ एनएसए एक्ट, आईपीसी 506, 302, 364A, 365,147,148, 149, 302, 307 धाराओं में मामला दर्ज है। लखनऊ में आर्म्स एक्ट, गैंगेस्टर एक्ट, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के मामलों में कई धाराएँ लगी हुई हैं।

माफिया डॉन अंसारी पर चंदौली, सोनभद्रा, मऊ, नई दिल्ली, पंजाब, आजमगढ़, बाराबंकी में गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है। जिनमें, क्रिमिनल लॉ, गैंगेस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट, आपराधिक धाराएं शामिल हैं।

लंबे आपराधिक रिकॉर्ड के बाद भी अंसारी को जनता द्वारा चुने जाने पर कोर्ट ने कहा, “लंबे आपराधिक रिकॉर्ड के बाद भी आरोपित लगातार 6 वर्षों तक एमएलए के पद पर चुना गया है। ये लोकतंत्र का सबसे भयावह चेहरा है….क्या यह सच में लोकप्रिय है या व्यर्थ के मानकों से उसे फायदा पहुँचाया गया है? ”

40 साल के आपराधिक रिकॉर्ड के बाद अंसारी को पहली बार इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सजा सुनाई है। पहले से जेल में बंद मुख्तार अंसारी की बेनामी संपत्तियों और अवैध निर्माणों पर योगी सरकार द्वारा कार्रवाई की गई है।

बलात्कार, हत्या, अपहरण, अवैध और बेनामी संपत्तियों जैसे संगीन मामले मामलों में अपराधी मुख्तार अंसारी का पारिवारिक परिचय अलग ही तस्वीर पेश करता है। मुख्तार अंसारी के दादा डॉ मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1926-27 में इंडियन नेशनल कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे थे।

महावीर चक्र विजेता उस्मान मुख्तार उनके नाना थे। सुब्हानउल्लाह अंसारी मुख्तार के पिता थे जो कि एक कम्यूनिस्ट नेता थे और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी मुख्तार के रिश्ते में चाचा लगते हैं।

Pratibha Sharma
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