फ़रवरी 2, 2023 1:44 पूर्वाह्न

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दीपावली 2022: पंच पर्वों, मुहूर्त्त, और लक्ष्मी पूजा की सभी जानकारी जानिए यहाँ

इस साल दीपावली 24 अक्टूबर 2022, सोमवार को है। दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ, विष्णु जी, गणेश जी, सरस्वती जी, कुबेर और इन्द्र की पूजा भी करनी चाहिए।

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धनतेरस लक्ष्मी विष्णु समुद्र मंथन धन्वन्तरि अमृत भागवत श्रीमद्भागवत पुराण अष्टम स्कंध दिवाली पूजा Dhanteras Diwali Lakshmi Vishnu Dhanwantari Samudra Manthan Bhagwat Puran 8th canto Vivaah

इस साल पाँच दिनों के दीपावली पर्व के बीच सूर्यग्रहण पड़ने से लोगों में कुछ बातों पर असमंजस बना हुआ है, इसलिए ‘द पैम्फलेट‘ ने अ.भा. विद्वत् परिषद्, काशी के डॉ. कामेश्वर उपाध्याय और सर्वेश्वर जयादित्य पंचांग, राजस्थान के संपादक पं. अमित शर्मा से बात की ताकि दीपावली के पाँचों पर्वों को लेकर कोई भ्रम न रहे।

इस लेख में हम बात करेंगे कि पाँचों त्यौहार और सूर्यग्रहण किस दिन हैं, मुहूर्त कब है और उस दिन क्या क्या करना चाहिए।

धनतेरस –      22 अक्टूबर 2022
रूप चतुर्दशी – 23 अक्टूबर 2022
दीपावली –     24 अक्टूबर 2022
गोवर्धन –       26 अक्टूबर 2022
भाईदूज –       27 अक्टूबर 2022

धनतेरस

धनतेरस लक्ष्मी विष्णु समुद्र मंथन धन्वन्तरि अमृत भागवत श्रीमद्भागवत पुराण अष्टम स्कंध दिवाली पूजा  दीपावली Dhanteras Diwali Lakshmi Vishnu Dhanwantari Samudra Manthan Bhagwat Puran 8th canto Vivaah

22 अक्टूबर, शनिवार को द्वादशी 16:02 बजे तक रहने और प्रदोष काल में त्रयोदशी मिलने से धनतेरस 22 अक्टूबर शनिवार को है।धनत्रयोदशी को भी लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती, कुबेर की पूजा करनी चाहिए। सायंकाल घर के बाहर यमदेवता के लिए एक बत्ती का दीपक रखना चाहिए।

कार्त्तिक कृष्ण त्रयोदशी के ही दिन समुद्र मन्थन से आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे और देवताओं को अमृत पिलाया था, इसलिए उदयकाल में त्रयोदशी 23 अक्टूबर को होने से उस दिन प्रातः भगवान धनवन्तरि का पूजन किया जाएगा।

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रूप चतुर्दशी

23 अक्टूबर, रविवार को सायंकाल चतुर्दशी में नरक चतुर्दशी या रूप चौदस होगी। दरवाजे के बाहर सूर्यास्त के बाद यमराज की प्रसन्नता के लिए चार बत्तियों वाला दीपक जलाया जाता है।

दीपावली

इस साल दीपावली 24 अक्टूबर 2022, सोमवार के दिन है। 24 अक्टूबर की शाम 16:32 बजे तक चतुर्दशी रहेगी, इसके बाद प्रदोषकाल व मध्यरात्रि में अमावस्या होने से आज ही के दिन दीपावली और लक्ष्मीपूजन किया जाएगा।

अगले दिन 25 अक्टूबर को सूर्यग्रहण है, जिसके सूतक सुबह 04:15 बजे से लग जाएँगे। इसलिए 24 अक्टूबर की रात्रि में लक्ष्मी पूजन के बाद सोने से पहले ही मंदिर को पर्दे से ढक देना होगा, और अगर दीपावली की रात अखण्ड दीपक जला रहे हैं तो सूतक आरम्भ होने से पहले ही उसे मंदिर के बाहर रख दें, क्योंकि अगले दिन सूतक में मंदिर में मूर्तियों और किसी भी वस्तु का स्पर्श नहीं किया जाएगा।  

सूर्यग्रहण

25 अक्टूबर को भौमवती अमावस्या को ग्रस्तास्त खण्ड सूर्यग्रहण है, जो सायंकाल 16:15 बजे से 18:33 बजे तक रहेगा। सूतक सूर्यग्रहण से 12 घंटे पहले सूर्योदय पूर्व 04:15 पर ही लग जाएगा। भारत में स्थान विशेष से सूर्योदय सूर्यास्त अलग होने के कारण ग्रहण के स्पर्श और मोक्ष के समय अलग अलग होंगे। इस दिन गोवर्धन नहीं होगा।

चूँकि ग्रहणकाल में ही सूर्य अस्त हो जाएँगे इसलिए शुद्धि स्नान (वस्त्रों सहित), पूजन तथा भोजन आदि अगले दिन अर्थात् 26 अक्टूबर 2022 को ग्रहण मुक्त शुद्ध सूर्य का दर्शन करने के बाद ही होगा। बाद में गंगाजल-गौमूत्र से सम्पूर्ण घर में शुद्धि करनी होगी। सक्षम लोगों को सूतक में भोजन नहीं करना चाहिए, इसलिए व्रत करें और जप, दान, पुण्य, नदी में स्नान आदि पुण्यकार्य करें क्योंकि सूर्यग्रहण में जप तप स्नान दान का दस लाख गुणा फल होता है।

गोवर्धन अन्नकूट महोत्सव

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26 अक्टूबर बुधवार को कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर अन्नकूट गोवर्द्धन पूजा होगी, जो दोपहर 15:04 से पहले ही सम्पन्न की जाएगी। भगवान कृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाएं।

भाईदूज

27 अक्टूबर गुरुवार को भाई दूज या यमद्वितीया मनाई जाएगी। इस दिन बहन भाई का तिलक करती है और भाई बहन के घर भोजन करते हैं। आज यमतर्पण, चित्रगुप्त सहित यमपूजन, यमुनास्नान, का भी किया जाता है। द्वितीया दोपहर 13:41  बजे तक है, इसलिए इसके पहले ही भाईदूज का मुहूर्त होगा।

दीपावली को लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त्त

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अखिल भारतीय विद्वत् परिषद्, काशी के डॉ. कामेश्वर उपाध्याय ने बताया कि दीपावली में लक्ष्मी पूजा के 3 काल सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं – प्रदोषकाल वृष और सिंह लग्न। सूर्यास्त के 72 मिनट बाद तक प्रदोषकाल होता है, इसके ठीक बाद वृष लग्न होता है और ढलती रात में सिंह लग्न आता है। यहाँ कुछ प्रमुख शहरों के लक्ष्मी पूजन समय दिए जा रहे हैं।

यह सामग्री और पुष्प भी हैं विशेष प्रिय

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पूजा सामग्री – धूप, घी का दीपक, नैवेद्य, ऋतुफल, वस्त्र, रोली, चन्दन, मिठाई, लाजा, पंचामृत, नारियल, गन्ना, अनार, केला, कपूर, माला, चाँदी का सिक्का

लक्ष्मी जी को प्रिय पत्र पुष्प –  बेलपत्र, तुलसी, केले के पत्ते, कमल, कनेर, जाती, चम्पा, जूही, मालती, पारिजात

लक्ष्मी प्राप्ति हेतु हवन में कमल, बेलफल, त्रिमधुर (गुड़-नारियल-केला), सूखा खीर तथा तिल का प्रयोग किया जाता है। आम, बेल, अनार की लकड़ी पर हवन करने से विशेष लाभ होता है। अशोक की लकड़ी पर लक्ष्मी मन्त्र से हवन करने से राज्य समृद्धि मिलती है।

विष्णु मंदिर में बेलवृक्ष के नीचे बैठकर लक्ष्मी की पूजा करने से तत्काल लाभ मिलता है। दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ, विष्णु जी, गणेश जी, सरस्वती जी, कुबेर और इन्द्र की पूजा भी करनी चाहिए।

लक्ष्मी प्रार्थना का मंत्र है –

नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरिप्रिये।
या गतिः त्वत् प्रपन्नानां सा मे भूयात् त्वदर्चनात्।।

लक्ष्मी जी को सागर से उत्पन्न होने के कारण सिन्धुजा, सागर सम्भवा, आर्द्रा, नमिता भी कहते हैं। लक्ष्मी जी की आराधना के लिए 27 मन्त्रों वाले श्री सूक्त का पाठ करना चाहिए। यह सर्वोत्तम विधान है।

इन स्तोत्रों का पाठ करने से होगा धन लाभ

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यहाँ पर लक्ष्मी आराधना के स्तोत्र दिए जा रहे हैं जिनके पाठ से धन की प्राप्ति होती है। स्तोत्र के नाम पर क्लिक करके स्तोत्र पढ़ा जा सकता है।

श्रीसूक्त
इंद्रकृत लक्ष्मी स्तोत्र
अगस्त्यकृत लक्ष्मी स्तोत्र
लक्ष्मीहृदय स्तोत्र
कनकधारा स्तोत्र
श्रीमहालक्ष्मी सहस्रनाम स्तोत्र
लक्ष्मी कवच
श्री लक्ष्मी चालीसा और लक्ष्मी जी की आरती

लक्ष्मी प्राप्ति के लिए विविध मंत्र

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यहाँ जन कल्याण कामना से भगवती महालक्ष्मी के कुछ लघु मन्त्र दिए जा रहे हैं। कम समय में इन मंत्रों के जप से लाभ उठा सकता है-

1. एकाक्षर मन्त्र –     ” श्रीं ” (श्रीम् )

2. चतुरक्षर मन्त्र –    एम् श्रीम् ह्रीं क्लीम्

3. दशाक्षर मन्त्र –     नमः कमलवासिन्यै स्वाहा

4. द्वादशाक्षर मन्त्र – एम् ह्रीं श्रीम् क्लीम् सौं जगत्प्रसूत्यै नमः

5. 27 अक्षर मन्त्र –  ॐ श्रीम् ह्रीं श्रीम् कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीम् ह्रीं श्रीम् महालक्ष्म्यै नमः

लक्ष्मी जी की आरती

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ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुम को निशदिन सेवत, मैयाजी को निस दिन सेवत
हर विष्णु विधाता ।
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता ।
ओ मैया तुम ही जग माता ।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता,
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

दुर्गा रूप निरंजनि सुख सम्पति दाता,
ओ मैया सुख सम्पति दाता ।
जो कोई तुम को ध्यावत ऋद्धि सिद्धि धन पाता,
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभ दाता,
ओ मैया तुम ही शुभ दाता ।
कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भव निधि की दाता,
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

जिस घर तुम रहती तहँ सब सद्गुण आता,
ओ मैया सब सद्गुण आता ।
सब संभव हो जाता मन नहीं घबराता,
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता,
ओ मैया वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव सब तुम से आता,
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

शुभ गुण मंदिर सुंदर क्षीरोदधि जाता,
ओ मैया क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहीं पाता ,
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

महा लक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता,
ओ मैया जो कोई जन गाता ।
उर आनंद समाता पाप उतर जाता,
ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

पंचांग सम्बन्धी उपर्युक्त जानकारियाँ श्रीसर्वेश्वर जयादित्य पंचांग, राजस्थान से ली गई हैं जो पूरे देश में एक समान हैं।

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Mudit Agrawal
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