सितम्बर 26, 2022 2:47 अपराह्न

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अलविदा रोजर फेडरर, टेनिस के जादूगर

टेनिस के इक्तालिस वर्षीय स्विस जादूगर रोजर फेडरर ने ट्विटर पर एक बेहद भावुक कर देने वाले खत के साथ आज प्रतिस्पर्धात्मक टेनिस को अलविदा कह दिया. और इसके साथ ही हमारे बचपन का एक और खूबसूरत चैप्टर आज खत्म हो गया.

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roger federer रोजर फेडरर

Any moment might be our last. Everything is more beautiful because we’re doomed. You will never be lovelier than you are now. We will never be here again.
Homer, The Iliad

टेनिस के 41 वर्षीय स्विस जादूगर रोजर फेडरर ने ट्विटर पर एक बेहद भावुक कर देने वाले खत के साथ आज प्रतिस्पर्धात्मक टेनिस को अलविदा कह दिया। और इसके साथ ही हमारे बचपन का एक और खूबसूरत चैप्टर आज खत्म हो गया।

आठ अगस्त उन्नीस सौ इक्यासी के दिन स्विट्जरलैंड के बेस़ल नामक नगर में जन्मे फेडरर ने सन् 1998  में सीनियर स्तर पर टेनिस खेलना शुरू किया। वो सन् 1998 में ही विंबलडन जूनियर चैंपियन बने थे और आगे चलकर उन्होंने अपना सर्वप्रथम ग्रैंड स्लैम भी सन् 2003 में विंबलडन में ही जीता था।

सन् 2001 में उन्नीस वर्षीय लड़के, रोजर फेडरर, का सामना विंबलडन में चार बार के गत विजेता व विश्व के नम्बर एक खिलाड़ी पीट सैंप्रास से हुआ। सभी का दांव लीजेंड्री खिलाड़ी पीट सैंप्रास पर लगा था. लेकिन, यहाँ बेहद अप्रत्याशित रूप से, पांच सेटों तक चले मैराथन मुकाबले में, गत विजेता पीट सैंप्रास को हरा कर उन्होंने संपूर्ण विश्व को संदेश दे दिया था: ए स्टार हैज़ अराइव्ड।

उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने पुरुषों की सिंगल स्पर्धा में रिकॉर्ड आठ दफा विंबलडन का खिताब, छह दफा ऑस्ट्रेलियन ओपन और रिकॉर्ड पांच दफा यूएस ओपन का खिताब जीता। अपने खेल के प्रति समर्पण के चलते ही रोजर फेडरर को निर्विवाद रिकॉर्ड पांच बार ‘लॉरियस स्पोर्ट्सस्पोर्ट्समैन ऑफ द ईयर’ चुना गया था।

एक सौ तीन एटीपी सिंगल्स टाइटल्स व बीस ग्रैंड स्लैम जीत चुके रोजर की खासियत यह थी कि उनके तरकश में ऐसे एक से एक मारक तीर हुआ करते थे जिनका तोड़ किसी भी विपक्षी खिलाड़ी के पास नहीं होता था। उनके खेल में एक सरप्राइज एलीमेंट होता था जिसके कारण उनके विरोधियों को उनके अगले दांव को भांप पाना लगभग नामुमकिन होता था। खासकर उनके बैकहैंड का तोड़ तो किसी भी खिलाड़ी के पास नहीं होता था. रोजर खेल के इतने बड़े खिलाड़ी हो गए थे कि ग्रास कोर्ट पर उन्हें एक मैच हरा देना भर ही खुद में एक चमत्कार जैसा माना जाता था। रिटायरमेंट की खबर लिखे जाते वक्त उनका कैरियर रिकॉर्ड रहा : 1251 जीत- 275 हार।

ग्रास कोर्ट पर पुरुषों की कैटेगरी में विश्व के सर्वकालिक महान खिलाड़ी रोजर फेडरर को खास तौर पर विंबलडन और यूएस ओपन की प्रतियोगिताओं में उनके अत्यंत खूबसूरत खेल के लिए सराहना मिला करती है। मगर अक्सर सफेद पोशाक में खेलने उतरने वाले इस स्विस टेनिस सितारे को महान बनाता है मैदान और उसके इतर उनकी एक भद्र पुरुष की छवि। वो सभी के लिए एक रोल मॉडल हैं। ऑस्ट्रेलियन बुश फायर हो या बच्चों से जुड़े कार्य; वह नेक कार्यों हेतु बढ़ चढ़ कर दान आदि भी किया करते हैं।

पिछले दो दशकों में जैसे फुटबॉल में रोनाल्डो बनाम मैसी की जद्दोजहद है वैसे ही एक प्रतिद्वंद्विता टेनिस प्रेमियों के नाम भी लिखी गई थी। रोजर फेडरर व राफेल नडाल की प्रतिद्वंद्विता को आखिर कौन नहीं जानता? यह इन दोनों खिलाड़ियों का ही जादू था जो बडे़ से बडे़ वैश्विक नेताओं, खिलाड़ियों व व्यापारियों से लेकर झुग्गी झोपड़ियों में रह रहे लोगों तक को भी अपना दीवाना बना लेता था। यह खेल के ऐसे उपासकों के लिए ही कहा गया है कि ‘दे डोंट मेक देम लाइक दिस ऐनीमोर’।

हाल ही में सेरेना विलियम्स द्वारा टेनिस से सन्यास की घोषणा और अब फेडरर का टेनिस को अलविदा कहना खेल जगत में एक बहुत बड़ा शून्य पैदा कर देगा। फेडरर, नडाल व जोकोविच न सिर्फ आधुनिक काल के बल्कि सर्वकालिक महानतम खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। डोमिनिक थीम, अलैक्जै़ंडर ज्वैरेव, मेदव्दैव आदि के खेल में वो स्थिरता नजर नहीं आती जो फिलहाल तो उन्हें इन खिलाड़ियों के बराबर खड़े होने का अधिकार दे। उन्हें अभी बहुत कुछ साबित करना है.

फेडरर के रिटायरमेंट के पीछे बड़ी वजह रही उनकी घुटने की चोटें। पिछले एक दशक में उनके घुटने की चोटों ने उनको बेहद तंग किया। गौरतलब है कि पिछले दो वर्षों में उनके घुटने की तीन दफा सर्जरी हुई। इसके बावजूद जब विशेष आराम मिलता न दिखा तो डॉक्टरों ने उन्हें जल्द दो और दफा सर्जरी कराने की सलाह दी। फेडरर का खेल किसी मुक्त बहती कविता सा था परन्तु इन चोटों ने उनको सदैव खासा परेशान रखा।

हर खेल में कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जिन्हें, अपने बेहतरीन खेल के चलते, विरोधी खेमे का भी सम्मान हासिल होता है। फेडरर एक ऐसे ही खिलाड़ी थे। आर्थर ऐश अरीना हो या विंबलडन का कोर्ट; फेडरर जहाँ जहाँ भी अपना रैकेट थामे कोर्ट में उतरे, उन्हें सदैव खेल के प्रसंशकों व साथी खिलाड़ियों का प्यार मिला।

संपूर्ण विश्व में शायद ही कोई टेनिस का प्रेमी हो जो उनसे टूटकर मोहब्बत न करता हो।

टेनिस जगत आपके हर एक बैकहैंड रिटर्न, आपकी हर एक मुस्कान के लिए सदैव शुक्रगुज़ार रहेगा।

तमाम खुशनुमा यादों के लिए शुक्रिया रोजर।

आप बहुत याद आएंगे.
हमेशा मुस्कुराते रहना.

गौरव शर्मा
गौरव शर्मा
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