सितम्बर 27, 2022 7:50 पूर्वाह्न

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अब तक की सबसे भयंकर 'हीट वेव' से झुलसा चीन

दक्षिणी चीन के एक बड़े हिस्से में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न भीषण गर्मी ने चीन में भयंकर सूखे के हालात पैदा कर दिए हैं।
ऐसी 'हीट वेव' चीन या दुनिया भर के किसी भी आधुनिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।

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china heat wave चीन हीट वेव

दक्षिणी चीन के एक बड़े हिस्से में पिछले कम से कम 70 दिनों से भूनकर रख देने वाली भीषण गर्मी ने चीन में भयंकर सूखे के हालात पैदा कर दिए हैं। ऐसी ‘हीट वेव’ चीन या दुनिया भर के किसी भी आधुनिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।

क्यों है ये चिंताजनक बात:

हाल के अध्ययनों के आधार पर, जलवायु वैज्ञानिकों को यह सवाल परेशान कर रहा है कि इस ‘हीट वेव’ में जलवायु परिवर्तन ने कितना योगदान दिया। जलवायु वैज्ञानिकों ने दुनिया भर में मौसम की प्रकृति में हो रहे भारी परिवर्तनों को देखते हुए 400 से अधिक अध्ययन प्रकाशित किए हैं, जिसमें अमेरिका में जंगल की आग और भारत और पाकिस्तान में हीटवेव से लेकर एशिया में टाइफून और यूके में रिकॉर्ड तोड़ बारिश तक शामिल है।

इन अध्ययनों के परिणाम इस बात के प्रमाण हैं कि असंतुलित मानवीय गतिविधियाँ खासतौर पर गर्मी से जुड़े और अन्य चरम मौसमों के जोखिमों को बढ़ा रही हैं। चरम मौसमी परिघटनाओं के सबूतों को इकट्ठा करने के लिए ‘कार्बन ब्रीफ’ ने आज तक प्रकाशित हर चरम-मौसम परिघटना को मैप किया है। यह रिपोर्ट मूलतः 2017 में प्रकाशित हुई थी जिसे हर वर्ष अपडेट किया जाता है।

कार्बन ब्रीफ के विश्लेषण से पता चलता है:

  • मैप में शामिल 504 चरम मौसम की घटनाओं में से 71% को मानव-जनित जलवायु परिवर्तन द्वारा अधिक संभावित या अधिक गंभीर बनाया गया था।
  • 9% घटनाओं या मौसमी प्रवृत्तियों को जलवायु परिवर्तन ने कम गंभीर बना दिया था, यानि सभी घटनाओं में से 80% ने कुछ मानवीय प्रभाव का अनुभव किया। शेष 20% घटनाओं और मौसमी प्रवृत्तियों पर कोई मानवीय प्रभाव नहीं देखा गया या इसका निर्णय नहीं किया जा सकता था।
  • वैज्ञानिकों द्वारा अध्ययन की गयीं 152 ‘हीट वेव’ घटनाओं में से 93% में जलवायु परिवर्तन ने घटना या प्रवृत्ति को अधिक संभावित या अधिक गंभीर बना दिया था।
  • 126 वर्षा या बाढ़ की घटनाओं के अध्ययन में 56% में पाया गया कि मानव गतिविधि ने घटना को और अधिक संभावित या अधिक गंभीर बना दिया था।
  • अध्ययन की गई 81 सूखे की घटनाओं के लिए, यह आंकड़ा 68% प्रतिशत है।
गर्मी से सूखी एक चीनी नदी

सूखे के कारण चीन ने रोका जल विद्युत का उत्पादन :

चीन से मिलीं मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 260 से अधिक मौसम केंद्रों ने इस गर्मी की लहर के दौरान अब तक का उच्चतम तापमान रिकॉर्ड किया। इस भयंकर ‘हीट वेव’ के कारण चीन में भयंकर सूखा पड़ा है, यहाँ तक कि नदियाँ और झीलें भी सूख गया हैं। इस कारण चीन के कुछ जगहों पर जलविद्युत का उत्पादन अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है।

जल विद्युत् के उत्पादन पर रोक के कारण चीनी के सिचुआन प्रान्त के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में अनिश्चितकाल के लिए बिजली काट दी गयी है। कई शहरों में बिजली कटौती के कारण सामान्य जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है।

आंकड़ों में देखें चीन में कैसे पड़ रही रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी

  • मेटियो फ्रांस के मौसम विज्ञानी एटियेन कपिकियन के अनुसार, गाओ में तापमान 43.5° सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि जियानयांग और ज़िगोंग में तापमान 43.4° सेल्सियस तक पहुंच गया।
  • गत सप्ताह मियांयांग में तापमान ने 41° सेल्सियस के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचकर अपने पिछले रिकॉर्ड को 4 डिग्री से तोड़ दिया, जो कि बहुत बड़ा अंतर है।
  • लगभग एक करोड़ आबादी वाले चोंगकिंग शहर में रात का तापमान 34.9° सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम वैज्ञानिक मैक्सिमिलियानो हेरेरा के अनुसार, चीन में कहीं भी अगस्त के दौरान यह रात का सबसे गर्म न्यूनतम तापमान है।
  • बेइबेई में गत सप्ताह तापमान 45°C तक पहुंच गया, जो कि झिंजियांग के बाहर चीन में अब तक का दर्ज सबसे अधिक तापमान है।

भारत में 45° सेल्सियस का तापमान सामान्य लग सकता है क्योंकि भारत में मानसूनी जलवायु है, पर हिमालय के उस पार चीन का ज्यादातर भाग शुष्क और ठंडा रेगिस्तान है, क्योंकि हिमालय मानसूनी हवाओं को चीन में प्रवेश करने से रोक देता है। इसलिए चीन के लिए यह तापमान औसत से कहीं ज्यादा है।

बहुत बड़ा भूभाग ‘हीट वेव’ की जद में

गर्मी की इस लहर ने चीन में अपनी भौगोलिक पहुंच का भी रिकॉर्ड बनाया है, चीन के भीतर लगभग 530,000 वर्ग मील में उच्च तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा चल रहा है। चीन में, इस गर्मी की लहर से 10 करोड़ लोग बुरी तरह प्रभावित हैं।

मौसम विज्ञानी बॉब हेंसन ने कहा, “मैं तीव्रता, अवधि, भौगोलिक सीमा और प्रभावित लोगों की संख्या के मिलेजुले मामले में 2022 की इस चीनी ‘हीट वेव’ की तुलना में कोई और ज्ञात घटना नहीं सोच सकता। जब सूखा पड़ता है, तो वह गर्म जलवायु का प्रभाव और बढ़ा देता है, इससे उपजाऊ भूमि परत पड़ने से खराब हो जाती है और तापमान को और ज्यादा बढ़ने में मदद मिलती है।

The Indian Affairs Staff
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