फ़रवरी 2, 2023 1:43 पूर्वाह्न

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आयकर भरने की प्रक्रिया को ‘सरल’ करने की तैयारी में सरकार, बढ़ेगा कर संग्रह

वर्तमान में रिटर्न भरने पर अगर एक व्यक्ति, एक से अधिक आय श्रेणियों में आता है, तो उसे अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते हैं। इस कारण समय की बर्बादी तो होती ही है, साथ ही, कागज़ी काम भी बढ़ता है।

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केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने देश में आयकर भरने में होने वाली कठिनाइयों को कम करने के लिए नया फॉर्म लाने की तैयारी की है। अब तक सरकार द्वारा अप्रत्यक्ष कर में जीएसटी (GST) रिटर्न भरने को लेकर होने वाली कठिनाइयों को काफ़ी हद तक दूर किया जा चुका है।

अब आयकर सम्बन्धित रिटर्न भरने में करदाताओं को होने वाली मुश्किलों को कम करने की तैयारी की जा रही है।

प्रत्यक्ष कर का प्रबन्धन करने वाले वित्त मंत्रालय के विभाग केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने बीते 1 नवम्बर, 2022 को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में नए फॉर्म का नमूना पेश किया और संभावित लाभ को भी बताया। साथ ही, इस पर जनता से भी फ़ीडबैक माँगा गया है।

आँकड़ों के अनुसार, 130 करोड़ से अधिक की जनसँख्या वाले देश में इस समय लगभग मात्र 8 करोड़ (6%) लोग ही आयकर भरते हैं। इन 8 करोड़ आयकर भरने वालों में व्यक्तिगत रूप से, फ़र्म, कम्पनियाँ और अन्य तरह के करदाता शामिल हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम और भी जरूरी हो जाता है।

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि आयकर रिटर्न भरने वालों की सँख्या में भी, वाकई में जो लोग कर भरते हैं, उनकी सँख्या और भी कम है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट बताती है कि असल में जो कर भरते हैं, उनकी सँख्या मात्र 1.5 करोड़ है।

ऐसे में सरकार द्वारा उठाया जा रहा कदम कर भरने की जटिलताओं को कम कर, रिटर्न भरने की प्रक्रिया में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कर भरने की जटिलता में कमी आने से करदाताओं के कर सम्बन्धी प्रक्रिया, नियमों को समझने तथा अलग से विशेषज्ञों की मदद लिए बिना, आयकर रिटर्न भरने में आसानी तो होगी ही, इससे कर भरने वालों की सँख्या में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

क्या है नया प्रस्ताव?

वर्तमान में, अलग-अलग तरह के करदाताओं के लिए 7 अलग-अलग फॉर्म हैं। जो विभिन्न स्त्रोतों से आय प्राप्त करने वाले लोगों के लिए हैं। यह फॉर्म ITR-1 से लेकर ITR-7 तक हैं। इनमें व्यवसाय से आय, नौकरी से आय, किसी सम्पत्ति से आय जैसे भिन्न स्त्रोतों के लिए अलग-अलग फॉर्म हैं। सरकार अब इन सभी फॉर्म को एक फॉर्म में ही शामिल करने की तैयारी कर रही है।

क्या हैं ये सात फ़ॉर्म

ITR-1 ’सहज’ – यह फॉर्म ऐसे करदाताओं के लिए है, जिनकी वार्षिक आय 50 लाख तक है, उनकी आय का जरिया तनख्वाह है या एक सम्पति से है।

ITR 2 – यह फॉर्म ऐसे व्यक्तियों या हिन्दू अविभाजित परिवारों के लिए है, जिनको किसी व्यापार के लाभ से आय प्राप्त नहीं हो रही है।

ITR 3 – यह फॉर्म ऐसे व्यक्तियों या हिन्दू अविभाजित परिवारों के लिए है, जिनको किसी व्यापार के मुनाफे से आय प्राप्त हो रही है।

ITR 4 – यह फॉर्म ऐसे व्यक्तियों या हिन्दू अविभाजित परिवारों या फर्मों के लिए है, जिनकी आय का स्त्रोत कोई व्यापार है।

ITR 5 और ITR 6 साझा कम्पनियों के लिए होता है। इनके शेयरधारक बदलने से कम्पनी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

ITR 7 गैर-लाभकारी संस्थाओं एवं ट्रस्टों आदि द्वारा यह फॉर्म भरा जाता है।

पुरानी कर व्यवस्था से होती है समय और कागज़ की बर्बादी

वर्तमान में रिटर्न भरने पर अगर एक व्यक्ति, एक से अधिक आय श्रेणियों में आता है, तो उसे अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते हैं। इस कारण समय की बर्बादी तो होती ही है, साथ ही, कागज़ी काम भी बढ़ता है। इन कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए सीबीडीटी ने सभी करदाताओं के लिए एक समान फॉर्म लाने की योजना बनाई है।

सीबीडीटी के अनुसार, यह कदम कई अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उठाया गया है। प्रेस रिलीज में सीबीडीटी ने कहा है कि इससे करदाताओं को फॉर्म के उन हिस्सों को नहीं भरना या देखना पड़ेगा जो उन पर लागू ही नहीं होते। साथ ही फॉर्म को इस तरीके से बनाया गया है, ताकि, फॉर्म भरने में आसानी हो। इसमें आने वाले कॉलम में निरन्तरता बनी रहेगी।

कर भरने की व्यवस्था का सरलीकरण

आयकर भरने में होने वाली कठिनाइयों में सुधारों को देखें तो, सबसे बड़ा बदलाव अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में देखने को मिलता है। वर्ष 1999 में अटल सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवन्त सिन्हा ने देश के करदाताओं के लिए रिटर्न भरने की प्रक्रिया को आसान किया।

यशवन्त सिन्हा ने कर भरने के लिए देश भर में एक ही फॉर्म लाया, जिसे ‘सरल’ का नाम दिया। यह एक पेज का फॉर्म था। इसमें सभी प्रकार के करदाता अपना रिटर्न दाखिल कर सकते थे। परिणामस्वरूप कर भरने प्रक्रिया के दौरान कागज़ों के ढेर से लोगों को मुक्ति मिली थी। इसका एक उद्देश्य यह भी था कि कर सम्बन्धी जटिलता कम होने से कर भरने वालों की सँख्या में भी वृद्धि होने की संभावना थी।

इस व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए जसवन्त सिंह ने अन्य स्त्रोतों से आय भरने का भी विकल्प दिया और इसे ‘नया सरल’ का नाम दिया। यह साल 2003-04 की बात है, जब वे वित्त मंत्री थे। कर भरने की व्यवस्था के सरलीकरण से आयकर में वृद्धि भी देखी गई।

आँकड़े बताते हैं कि एक ओर जहाँ देश का प्रत्यक्ष कर संग्रहण वर्ष 1998-99 में 57,244 करोड़ रुपए था। वहीं नए फॉर्म ‘सरल’ आने के बाद अगले साल बढ़कर 70,937 करोड़ रुपए हो गया। जब कर भरने के नए फॉर्म ‘नया सरल’ आया, उस समय तर कर संग्रहण 1 लाख करोड़ रुपए के पार हो चुका था।

कर भरने के विभिन्न फॉर्म, पी चिदंबरम लाए

यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहते हुए पी चिदंबरम ने ‘सरल’ फॉर्म को वर्ष 2006 में खत्म कर, अलग-अलग तरह के करदाताओं के लिए अलग-अलग फॉर्म निकाले। ‘सरल’ जहाँ सिर्फ एक पन्ने का था, वहीं पी चिदंबरम 4 पन्नों के नए फॉर्म ले आए थे। उस समय भी इस कदम की काफी आलोचना हुई। इन फॉर्म में कुछ ऐसी निजी जानकारियाँ माँगी गईं, जिन पर लोगों ने काफी ऐतराज भी जताया।

इन फॉर्म (2E और 2F) में यह जानकारी माँगी गई थी कि लोगों ने जितने भी बड़े खर्चे साल भर में किए हो, उनकी भी जानकारी फॉर्म में दी जाए, इस पर लोगों ने आपत्ति जताई थी। इसके अतिरिक्त यह फॉर्म काफी लम्बे थे। जिनमें बहुत अधिक और अनावश्यक जानकारी माँगी गई थी।

वित्त मंत्री पी चिदंबरम के इस कदम की काफी आलोचना हुई। हालाँकि, 3 साल बाद ही इस फैसले को वापस लेकर तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी फिर से पुराना फॉर्म ‘सरल’ वापस लेकर आए थे। उन्होंने इसे समय की माँग बताते हुए कहा भी था कि “अब वह समय आ गया है, जब हम एक निष्पक्ष कराधान प्रक्रिया बनाएँ।”

सरलीकरण का ताजा उदाहरण जीएसटी

किसी भी देश के लिए उसका राजकोष बहुत मायने रखता है। वित्तीय सम्पदा का परिचायक राजकोष ही होता है। भारत के राजकोष में आने वाला धन, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर से मिलकर बनता है। ऐसे में यह बहुत जरूरी हो जाता है कि सरकार राजकोष में धन लाने की व्यवस्था को जितना हो सके, सुगम बनाए।

इसका सबसे ताजा और प्रभावी उदहारण, वस्तु एवं सेवा कर (GST) के रूप में देखा जा सकता है। अलग-अलग प्रकार के सैंकड़ों ‘कर’ खत्म कर, उन्हें जीएसटी के अन्तर्गत लाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने जीएसटी जमा करने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया है। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाए गए हैं। जिनके माध्यम से जीएसटी जमा करने के साथ-साथ ई-वे बिल भी निकाले जा सकते हैं।

इस तरह के प्रयासों के कारण देश में जीएसटी का संग्रह लगातार बढ़ रहा है। नवम्बर, 2022 के जीएसटी आँकड़े बताते हैं कि देश में चालू वित्त वर्ष के प्रत्येक माह में 1.4 लाख करोड़ से अधिक का जीएसटी संग्रहण हुआ है। अक्टूबर, 2022 की बात करें जीएसटी संग्रह लगभग 1.51 लाख करोड़ रहा।

सरकार ने प्रत्यक्ष कर यानी आयकर के सरलीकरण के लिए भी नए प्रयास किए हैं जिनमें फेस्लेस असेसमेंट, तेज आयकर रिफंड, कराधान की प्रकिया में तेजी और नए आयकर फ़ाइल करने के पोर्टल शामिल हैं। यह नया पोर्टल भारतीय कम्पनी इनफ़ोसिस के द्वारा बनाया गया है, जिससे लोगों को अपना आयकर ऑनलाइन भरने में आसानी हो रही है।

Arpit Tripathi
Arpit Tripathi

अवधी, पूरब से पश्चिम और फिर उत्तर के पहाड़ ठिकाना है मेरा

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