फ़रवरी 4, 2023 2:40 अपराह्न

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कश्मीर से किबिथू तक: पर्वतीय राज्यों के विकास में कनेक्टिविटी की भूमिका

कनेक्टिविटी के माध्यम से राज्यों को अपने स्तर पर मजबूत बनाने की यह कवायद न सिर्फ जनता के लिए लाभदायक है बल्कि विकास के क्षेत्र में यह राज्यों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी जन्म देगी।

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हाल ही में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री विकास पहल योजना (पीएम डिवाइन) को अपनी मंजूरी दी। यह योजना उत्तर-पूर्व की आवश्यकताओं पर आधारित सामाजिक विकास परियोजनाओं के लिये बुनियादी ढांँचे को निधि प्रदान करेगी। इस योजना की घोषणा इस वर्ष 2022-23 के बजट में की गई थी। पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के क्रम में यह एक बड़ी परियोजना साबित हो सकती है। 

वहीं दूसरी ओर, गुरुवार 13 अक्टूबर को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने पहली त्रिपुरा-मणिपुर जनशताब्दी ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इससे क्षेत्र के व्यापार और कनेक्टिविटी में वृद्धि होगी। पिछले कुछ वर्षों में देश के पर्वतीय राज्यों को विकास से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किये जा रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप दशकों तक पिछड़े रहे पर्वतीय राज्य और इलाके अब बाकी देश के आर्थिक विकास से जुड़ने लगे हैं।  

जम्मू एवं कश्मीर

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 का हटना आर्थिक तौर पर एक सही और महत्वपूर्ण कदम था जिसके बाद केंद्र सरकार ने कई योजनाओं का विस्तार किया। जम्मू कश्मीर की ओद्यौगिक नीति आज देश की सबसे आकर्षक नीति है। सरकार का मानना है कि इस नीति से जम्मू कश्मीर में 55000 करोड़ से अधिक का निवेश आएगा। यह उम्मीद तब और जगी, जब इस वर्ष जम्मू कश्मीर में रिकॉर्ड 1.62 करोड़ पर्यटक आए। जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों की यह संख्या आजादी के बाद से सबसे अधिक है। वहीं, 30 वर्षों बाद घाटी में सिनेमा घरों की भी वापसी हुई है। 

इंफ्रास्ट्रक्चर की दृष्टि से स्वास्थ्य क्षेत्र की बात करें तो इस समय यहाँ सात मेडिकल कॉलेज के अलावा दो एम्स का कार्य प्रगति पर है। जम्मू-कश्मीर एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ हर व्यक्ति को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिला है।

वहीं बात हिमाचल प्रदेश की करें तो इस राज्य को बने हुए 51 साल हो चुके हैं। सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के साथ प्रदेश ने सभी क्षेत्रों, विशेष तौर पर कृषि, बागवानी में प्रगति की है। वर्तमान में राज्य का एक बड़ा क्षेत्र बागवानी के अधीन है। बागवानी क्षेत्र की वार्षिक आय औसतन 4,575 करोड़ रहती है।

कठिन भौगोलिक परिस्थियों में भी राज्य ने टीकाकरण का काम सबसे पहले पूरा किया जिससे पर्यटन में कोई रुकावट नहीं आई। इस पर्यटन को बढ़ाने में अटल टनल ने भी अहम भूमिका निभाई। दरअसल,यह टनल वर्ष 2000 से प्रस्तावित थी जो बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करती है। बेहतर कनेक्टिविटी के लिए उड़ान स्कीम के अंतर्गत वर्तमान में 38 नए हेलिपैड भी प्रस्तावित हैं। 

हाल के दिनों में प्रधानमंत्री मोदी हिमाचल दौरे पर थे।

इस दौरे में, प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष २०१० से प्रस्तावित ऊना-हमीरपुर रेल लाइन की आधारशिला रखी गयी। कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा; पहले की सरकारें सुविधाएं वहां देती थीं जहां मेहनत कम लगती थी और राजनीतिक लाभ ज्यादा मिल जाता था। इसलिए दुर्गम क्षेत्रों में सुविधाएं सबसे अंत में पहुंचती थीं जबकि सबसे से अधिक जरूरत इन क्षेत्रों को ही थी। सड़क, बिजली, पानी के लिए पहाड़ी क्षेत्रों का नंबर सबसे अंत में आता था। 

प्रधानमंत्री की इस बात को वर्ष 2000 में गठित उत्तराखंड के परिपेक्ष्य में देखें तो वर्तमान में दुर्गम क्षेत्रों के लिए कनेक्टिविटी हेतु केंद्र सरकार का ‘चारधाम प्रोजेक्ट’ जारी है जिसके अंतर्गत आल वेदर सड़क योजना-केदारनाथ बद्रीनाथ गंगोत्री यमुनोत्री धाम से जुड़े इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य १२ महीने पहाड़ी राजमार्ग को आवागमन के लिए सुगम बनाना तथा चीन सीमा से सटे क्षेत्रों तक पहुंच आसान करना है। दरअसल उत्तराखंड की एक आबादी का एक बड़ा हिस्सा चारधाम यात्रा से जुड़ा हुआ है। यह इनकी आर्थिकी का मजबूत आधार है। आल वेदर सड़क का कार्य अब अंतिम चरण में है। 

चारधाम प्रोजेक्ट से जुड़ी दूसरी महत्वाकांक्षी योजना है ऋषिकेश -कर्णप्रयाग रेल लाइन। ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच प्रस्तावित 125.20 किलोमीटर राज्य के चार धामों को जोड़ेगी। रेलवे लाइन के निर्माण से ऋषिकेश और कर्णप्रयाग के बीच यात्रा का समय जो अभी 7 घण्टे है, मात्र दो घंटे रह जाएगा।

वहीं, शुक्रवार ,१४ अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट केदारनाथ रोपवे को मंजूरी मिल गयी है। इस रोपवे निर्माण से आठ घंटे की पैदल दूरी 30 मिनट में पूरी की जा सकेगी। 

कनेक्टिविटी का यही महत्वपूर्ण पहलू पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए विकास की दौड़ में सबसे अहम साबित हुआ है। आज़ादी के बाद से पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए योजनाएं तो बनी पर अधिकांश का क्रियान्वयन ठीक ढंग से हो नहीं सका। शायद यही कारण था कि पूर्वोत्तर राज्य आतंकवाद, अलगाववाद और गरीबी से संघर्ष करते रहे। पिछली केंद्र सरकारों की योजनाएं पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचते पहुंचते भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती थी। 

इसमें बड़ा बदलाव तब दिखा जब प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से पूर्वोत्‍तर राज्‍यों की राजधानियों को देश के अन्‍य हिस्‍सों से रेलवे के माध्‍यम से जोड़ने की घोषणा की। नेशनल कैपिटल कनेक्‍टीविटी प्रोजेक्‍ट्स के तहत छह परियोजनाओं पर काम चल रहा है जो कि 2024 से पहले पूरी हो जाएंगी। असम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा की राजधानियों को पहले ही “ब्रॉड गेज” रेल नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग, मणिपुर की इंफाल, नागालैंड की कोहिमा और मिजोरम की राजधानी आइजोल को नयी ”ब्रॉड गेज” लाइनों से जोड़ने का काम जारी है।

इसके अलावा, भारतीय रेलवे इंफाल को गुवाहाटी से जोड़ने वाले देश की सबसे लंबी रेलवे सुरंग का निर्माण कर रहा है। 

केंद्र सरकार, ‘पूर्व की ओर देखो नीति’ के तहत पूर्वोत्तर के राज्‍यों का दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ सुदृढ़ सड़क-रेल नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत रेलवे उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों के साथ चीन, म्यांमार और बांग्‍लादेश के सीमावर्ती इलाकों को जोड़ने का कार्य चल रहा है। इसमें अरुणाचल प्रदेश में 180 किलोमीटर रेल लाइन की योजना शामिल है जो तवांग में चीन सीमा तक कनेक्‍टीविटी देगी। 

रेलवे के अलावा वर्ष 2020 में उड़ान स्कीम के तहत चौथे चरण में 78 नए हवाई मार्गों को मंजूरी दी गयी।जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में हवाई संपर्क बढ़ाना है। पूर्ववर्ती सरकारों में पर्वतीय राज्यों को केंद्र सरकार के विशेष पैकेज पर निर्भर रहना पड़ता था। केंद्र की ओर देखने की यह संस्कृति संघ राज्य के संबंधों को राजनीतिक रूप से भी प्रभावित करती थी।  

कनेक्टिविटी के माध्यम से राज्यों को अपने स्तर पर मजबूत बनाने की यह कवायद न सिर्फ जनता के लिए लाभदायक है बल्कि विकास के क्षेत्र में यह राज्यों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी जन्म देगी। यह अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मकता का सूचक है। 

Abhishek Semwal
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