फ़रवरी 4, 2023 3:16 अपराह्न

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लेस्टर दंगा: कट्टरपंथियों ने हिंदुओं के खिलाफ इस वक्त ब्रितानी शहर ही क्यों चुना?

लेस्टर की घटनाओं के दौरान और इनके बाद में स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय और कई भारतीय मीडिया संस्थानों ने धड़ल्ले से सेलेक्टिव कवरेज और पक्षपाती रिपोर्टिंग की।

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आधुनिक परिभाषा के हिसाब से भारत एक ऐसा राष्ट्र है जिसका सैकड़ों वर्षों का ‘कम्पोजिट कल्चर’ यानी, ‘अनेकता में एकता’ का इतिहास रहा है। कुछ एक जैसे हैं, वहीं कुछ मिलाजुला ‘मल्टीकल्चरलिस्म’ (बहुसभ्यतावाद) जैसे तत्व जिसकी चर्चा हर तरफ जोरों पर है। भारतीय समाज में ये तब से हैं, जब बाकी विश्व अपने दैनिक जीवन के मूलभूत वस्तुओं/क्रियाओं के लिए संघर्षरत था।

फ़िलहाल देखें तो पिछले एक-दो दशकों में हुए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलाव स्वतंत्रता के बाद के 5-6 दशकों के मुकाबले ज्यादा तेज़ी से हुए हैं और इन सालों में बदलते समाज के साथ बदली है सामाजिक, राजनितिक और धार्मिक समस्याएं। धार्मिक बदलाव में विशेषकर बढ़ता ‘कट्टरवाद’ जो निजी और संकीर्ण स्वार्थ के लिए मानवीय सहअस्तित्व और सहजीविता को ही नष्ट करने की ओर बढ़ता जा रहा है।

वैसे इस कट्टरवाद ने सबसे ज्यादा हानि भी इन्हीं सिद्धांतों को पहुंचाई है। आज का समाज भी पहले की अपेक्षा ज्यादा संवेदनशील हो गया है। इसके भी बहुपक्षीय पहलु हैं हम उन पर नहीं जाएँगे। अभी हर छोटी-बड़ी बातों पर लोग बढ़-चढ़ के अपनी ओपिनियन/विचार रखने से नहीं कतराते हैं।

हम सब भी उसी समाज का हिस्सा हैं तो हम भी प्रासंगिकता के साथ हर उस समकालीन मुद्दों पर अपने विचार आप तक लगातार पहुँचाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। आज का विषय भी उसी समस्याओं-मुद्दों के इर्द-गिर्द ही चक्कर कटेगी ऐसा हम इस आर्टिकल का डिस्क्लेमर में कह सकते हैं। वैसे यह न तो मूलतः आर्टिकल है और न ही रिपोर्ट, बल्कि दोनों का एक संतुलित मिश्रण!

Leicestershire (लेस्टरशायर) : मिसइन्फोर्मशन पर आधारित केस स्टडी

आज के इस ख़ास आर्टिकल में बात करनी है पिछले दिनों ब्रिटेन के कई शहरों में हिन्दुओं पर हुए टार्गेटेड हमले की। यूँ तो इस्लामी कट्टरवाद की चपेट में आने का कारण कभी भी रैंडम नहीं बल्कि सब एक को-ऑर्डिनटेड प्लान का ही हिस्सा होता है। यहाँ भी केस ठीक ऐसा ही है। इस घटना को अचानक से आया बदलाव न मानकर धीरे-धीरे कर पहुँची गई एक परिस्थिति के रूप में समझिए।

‘इंडियन डायस्पोरा’, जिसकी मौजूदगी पश्चिमी देशों में कई दशकों से रही है, अपने साथ अपनी सभ्यता को भी जोर-शोर से सेलिब्रेट करती है। बात चाहे हो भारतीय त्योहारों की या फिर योग, आयुर्वेद, आध्यात्म जैसी मानवीय सम्पदा, सभी को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में इनका अभूतपूर्व योगदान है। ठीक इसी प्रकार बात क्रिकेट/हॉकी जैसे खेलों में स्टेडियम में भारत को सपोर्ट करने से लेकर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को समूचे विश्व में उत्सव के रूप में माना चाहिए। हर जगह इनका भारत के प्रति प्रेम जाहिर है।

इस वर्ष जब हम देश-विदेश में बैठे सभी भारतीय गर्व से अपनी आज़ादी का 75वीं वर्षगांठ (आज़ादी का अमृत महोत्सव) धूमधाम से मना रहे हैं, तब ब्रिटेन में रह रहे भारतीय समुदाय ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और रैली भी निकाली, लेकिन यह ख़ुशी पाकिस्तानी-इस्लामी लॉबी को हज़म नहीं हो पाई।

जैसे कि हर घटना में कोई न कोई विरोधी होता ही है, उन्होंने भारतीयों पर निशाना साधा और उनकी गाड़ियों/घरों में लगे तिरंगे को भी जबरन उतरवा दिया। दूसरी घटना है टी-२० एशिया कप की, जिसमें भारत-पाकिस्तान मुक़ाबले में पाकिस्तान की हार के बाद कई पाकिस्तानी क्रिकेट प्रशंसकों ने भारतीय प्रशंसकों पर हमले की, तिरंगे का अपमान किया और हिंदू-विरोधी नारों के साथ-साथ भारत-विरोधी नारे भी लगाए, जिससे हाथापाई तक की नौबत तक आ गई।

इस हाथापाई में दोनों तरफ के लोगों को चोटें आईं, लेकिन पुलिस द्वारा बीच-बचाव से मामला शांत हो गया। देखा जाये तो यह मामला यहीं ख़त्म हो जाना चाहिए था, लेकिन फिर वही बात आती है कि जब आपका एजेंडा ही अशांति फ़ैलाने का हो तब ऐसी घटना को मरने कैसे दे सकते हैं? हुआ भी ठीक ऐसा ही, इसी बात को मुद्दा बनाकर नफरत फैलाई गई।

तभी से लगातार पाकिस्तानी मुस्लिम हिन्दुओं पर टार्गेटेड अटैक्स किए जा रहे हैं। इसी दौरान 4 सितम्बर 2022 को गणेशोत्सव में जाते हिन्दू युवकों को पीटा भी गया। कभी उनके दुकानों पर तो कभी सड़कों पर। रात के अँधेरे में ढके चेहरे और धारदार हथियार से हिन्दुओं के घर-प्रॉपर्टीज पर हमला करने लगे।

मानो इन घटनाओं का एक सिलसिला सा चालू हो गया हो जैसे, पुलिस से भी कोई ठोस सहायता नहीं मिलने पर पिछले शनिवार (17 सितम्बर) को हिन्दुओं ने सांकेतिक विरोध के नाम पर एक रैली निकाली, जो कि सुनियोजित थी और पुलिस द्वारा क़ानूनी रूप से स्वीकृत भी थी। लेकिन यह रैली जब लेस्टर शहर के एक मुस्लिम-बहुल इलाके से गुजरी तो अचानक ही सैकड़ो की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग सड़को पर उतर आए और हिंदू-विरोधी नारेबाजी करने लगे। इन कट्टरपंथियों को ‘हिन्दू युवकों द्वारा मुस्लिम लड़की को अगवा करने’ की झूठी खबर फैला कर भड़काया गया था।

इस घटनाक्रम के दौरान और बाद एक नज़र पुलिस और एडमिनिस्ट्रेशन के कंडक्ट/क्राइसिस मैनेजमेंट पर भी डालें तो दो तरह के विचार मन में आते हैं। एक तो ये कि एडमिनिस्ट्रेशन ने जानबूझकर ऐसे हालत बनने दिए गए, वजह जो भी हो। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि ये डेवलपमेंट पिछले कई महीनों से चल रहा है।

छिटपुट घटनाएं भी होती रही हैं। भारी पुलिसबल की मौजूदगी में भी कैसे दंगाई हिन्दुओं के घरों, दुकानों, धार्मिक स्थानों, मंदिरों पर हमला करते रहे, धार्मिक टिप्पणियाँ करते रहे, हिन्दुओं को गालियां देते रहे? या दूसरा तर्क है कि वो टेक्निकली और मोरली ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयार नहीं थे। हों भी तो कैसे? कौन सी लड़ाई इन्होने अपने घर के आँगन में लड़ी है?

उपनिवेश का तो इतिहास रहा है इनका। अब संकट अपने दरवाज़े पर खड़ा है तो हाथ-पाँव तो फूलेंगे ही। कुछ समय पहले ही ब्रिटेन के इन शहरों में इस्लामवादियों द्वारा यहूदियों के खिलाफ भी ऐसे ही (एंटी-सेमेटिक) हिंसक प्रदर्शन किए गए थे। तब भी पुलिस की मौजूदगी में यहूदी बच्चों को लिंच करने की कोशिश की गई थी। खुलेआम यहूदियों का खून करने की धमकी और नारेबाजी की गई थी।

फर्स्ट क्लेम : Hindus are Racists and Fascists

यह दावा/प्रोपगैंडा कोई नया तो नहीं है, लेकिन ये सारे हिंदू-विरोधी और भारत-विरोधियों के ख़िलाफ़ पाकिस्तानी मुस्लिमों का ‘मोस्ट कॉमन रिज़ॉर्ट’ रहा है। ब्लेम किया गया कि हिन्दुओं ने उनको उकसाया। हालाँकि, उनके उकसाए जाने का कोई स्थापित मापदंड तो ज्ञात नहीं है, लेकिन कुछ कारण हमने जो पाए, वे कुछ इस प्रकार हैं –

  • जय श्रीराम और भारत माता की जय के नारे लगाना
  • मुस्लिम बहुल इलाक़ों से होकर शान्तिपूर्ण रैली निकालना
  • उन्हें पब्लिक प्लेस में नमाज़ पढ़ने से रोकना
  • जानवरों को उनके सामने लाना (हास्यास्पद लग सकता है लेकिन यह सच है.. पुलिस के कुत्ते अगर उनके सामने दिख जाएँ तो उसे एक्ट ऑफ़ अग्रेशन/प्रोवोकेशन माना जायेगा.. एक वायरल वीडियो में ऐसा कहते कहते सुना जा सकता है..)

दूसरा दावा : इस्लाम से नफ़रत करते हैं हिंदू, मस्जिद पर हमला और मुस्लिम-विरोधी नारे लगाए

यह एक झूठ है, जिसे मुस्लिमों और स्थानीय मीडिया चैनल्स ने खूब फैलाया गया, जबकि लेस्टरशायर पुलिस ने जाँच के बाद ऐसे किसी भी घटना से इंकार कर दिया। खैर, ये पैटर्न तो ब्रिटेन से लेकर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश तक एक सा है।

याद कीजिये कैसे बांग्लादेश में खुद इस्लामवादियों द्वारा ही दुर्गा पूजा पंडाल में क़ुरान रखकर हिन्दुओं पर हिंसा की गयी थी। ऐसे में इनका यह दावा भी संदेहास्पद ही लगता है।

तीसरा दावा: हिंदुओं ने मुस्लिम कदली को अगवा करने की कोशिश की

यह झूठ तो सबसे घिनौना और आपराधिक है। मतलब जिन कट्टरपंथियों का इतिहास ही इन अमानवीय कृत्यों से भरा पड़ा है वो भी इस अजेंडे के तहत हिन्दुओं को डिस्क्रेडिट कर बैकफुट पर धकेलने की कोशिश करते दिखे।

अभी जब हम यह लिख रहे हैं, उसी वक़्त ईरान में चालीस से अधिक महिलाओं की हत्या हो चुकी है। महिलाओं के प्रति इन कट्टरपंथियों की ‘उदारता’ पूरी दुनिया में दिख रही है। पाकिस्तान में हर साल यही लोग हज़ारों हिन्दू लड़कियों को अगवा कर जबरन उन्हें मुसलमान बनाते हैं। कोई भी हिन्दू इस तरह की घटना का समर्थन नहीं कर सकता।

वहीं, लेस्टरशायर पुलिस ने भी किसी भी हिंदू द्वारा कीस मुस्लिम लड़की के अपहरण की घटना को सरासर अफ़वाह बतया है। यानी, हिंदू-मुस्लिम के नैरटिव के लिए लेस्टर के कट्टरपंथियों द्वारा रची गई यह एक और झूठी क़हानी थी।

लेस्टर दंगों के मुख्य आरोपित

जैसा कि हमने पहले ही बताया और जो कि एकदम स्पष्ट ही है, हर ऐसी घटना के पीछे ऐसे किरदार या यूँ कहिए कि की-प्लेयर्स होते हैं, जिनके लिए इस्लामी कट्टरपंथी, चरमपंथी, हिंदू-घृणा, यहूदी-घृणा होना मोललभूत आवश्यकता है। यहाँ भी इन घटनाओं के पीछे ऐसे ही लोगों का हाथ है, जो लम्बे समय से हिन्दू-विरोधी, भारत-विरोधी नैरेटिव को पुश करते आ रहे हैं। और इन सबके किरदार भी बंटे हुए होते हैं।

सोशल मीडिया पर हेटफुल/फेक प्रोपगैंडा फ़ैलाने से लेकर ‘ऑन ग्राउंड मॉब’ को लीड/मोबिलीज़ करना, मीडिया चैनल्स पर बैठकर इंटरव्यू/बहस में हिंसा को जायज़ बताने से लेकर सड़कों पर खुद को पीड़ित बताते हुए मीडिया में बयान देना। इनमें से कुछ चुनिंदा लोगों की बात करेंगे और बताएँगे कि इनके तार किन लोगों और संगठनों के साथ हैं, ताकि पूरी पिक्चर आप को विस्तार से समझ आ सके।

यहाँ पहला और एक बहुत आम नाम सामने आता है – माजिद फ़्रीमैन (Majid Freeman (@Majstar7)। इसने सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय मीडिया (जिनमें कि कुछ भारतीय मीडिया हाउस/न्यूज़ पोर्टल्स) पर लम्बे समय से भारत-विरोधी, हिंदू-विरोधी, कश्मीर, भारत में धार्मिक आज़ादी, फ़ासिवादी, नस्लीय हिन्दू, हिन्दुत्वा फोर्सेज, RSS-BJP प्रोपगैंडा जैसे कई फेक नैरेटिव्स जारी कर हिन्दुओं के खिलाफ माहौल बनाने का काम किया है।

इसी ने लेस्टर में मस्जिद पर हमले और मुस्लिम लड़की के किडनैप होने की खबर भी फैलाई, जिसे पुलिस अधिकारियों ने अपनी जाँच में गलत बताया। इसी माजिद पर अल-क़ायदा और उस से जुड़े दूसरे सहयोगी संगठनों को प्रमोट और सपोर्ट करने का आरोप है।

इस माजिद का एक और कनेक्शन सामने आया है। एक संगठन है ‘One Nation’ (वन नेशन/एक राष्ट्र) जिसके साथ मिलकर इसने अल-क़ायदा जैसे आतंकी संगठन के लिए चंदा जुटाने का काम भी किया है। ‘One Nation’ के संस्थापक अरशद पटेल (Arshad Patel) के खिलाफ 5 जुलाई, 2005 को लंदन में हुए बम धमाकों में जांच भी हुई थी।

यहाँ दिलचस्प बात यह है कि अरशद पटेल की बहन उन धमाकों में मारे गए फ़िदायीन आतंकी में से एक की बेवा (Widow) है। इसने 9/11 हमलों में शामिल पाकिस्तानी टेररिस्ट आफ़िया सिद्दीक़ी उर्फ़ ‘लेडी अलक़ायदा’ को खुला समर्थन दिया था और उसकी रिहाई की वकालत की थी।

अलक़ायदा टेररिस्ट अनवर अल-अवलाकी(Anwar Al-Awlaki) के लिए श्रद्धांजलि वाले वीडियो भी पोस्ट किए थे। इसके अलावा, एक और अलकायदा आतंकी इफ़्तेख़ार जमन (Ifthekar Jaman) के लिए इसी माजिद ने दुआ मांगने की अपील की थी और उसे एक ‘शहीद’ भी बताया।

इस सिलसिले में दूसरा नाम है मुहम्मद हिजाब (Mohammed Hijab- @mohammed_hijab)। ये आपको लेस्टर प्रकरण में वायरल होते कई वीडियो में दिखा ही होगा। यह भी एक बड़े स्तर पर हिंदूघृणा से भरा, यहूदी-घृणा में लिप्त कट्टरपंथी मुस्लिम है। यह लेस्टर में घटनास्थल पर मौजूद भीड़ को लीड कर रहा था और उनको भड़का रहा था, जिन्होंने बाद में जा कर हिन्दू मंदिरो पर हमले किए, धार्मिक झंडों को तोड़ा और उन्हें जलाया भी।

इसे इस मामले में सबसे गम्भीर आरोपित कह सकते हैं क्योंकि इस से पहले भी इसने ऐसे ही ब्रिटेन के सड़कों पर मज़हबी नारे लगाए थे, लेकिन तब निशाने पर हिंदू नहीं बल्कि यहूदी थे। एक वीडियो में आप इसे कहते सुन सकते हैं कि “हमें पुलिस पे भरोसा नहीं है और हम खुद ही इसका जवाब हिंसा से देंगे”।

तब भी यहूदियों (Jews) की मॉब लिंचिंग करने की कोशिश की गई थी। तब भी खुलेआम कत्लेआम की बात की गई थी, उन्हें भी Zionists (यहूदी हितों की बात करने वाला, राष्ट्रवादी यहूदी) कह कर निशाना बनाया गया था और उनके खिलाफ भी हिंसा को इसी धूर्तता के तहत जायज़ ठहराया गया था, वैसे भी ये उनके SOP का हिस्सा है।

ऐसे और भी कई नाम हैं, जैसे शकील अफसर (Shakeel Afsar), जो कि भारत-विरोधी Kashmir Liberation Organisation का मेंबर है। यह भी भीड़ का नेतृत्व कर रहा था और इसने खुले में धमकाया भी।

शकील अफ़सार का कहना था, “अगर हिन्दू मंदिर और लेस्टर में रहने वाले हिन्दुओं ने मिलकर एक साथ RSS-BJP की आधिकारिक रूप से निंदा नहीं की तो मुस्लिम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और उनके मुताबिक़ जरुरी और उचित बलप्रयोग करेंगे।”

अगला नाम है मोअज़्ज़म बेग (Moazzam Begg)। बाक़ी सभी की ही तरह इसके हिन्दू-घृणा को भी इसके ट्वीट्स के माध्यम से देखा-समझा जा सकता है। इसके बारे में कहा जा रहा है कि इसने अल-क़ायदा के ट्रेनिंग कैम्प्स में हिस्सा लिया था और उसके लिए आतंकियों को भर्ती भी करता था।

इस घटना के बाद पुलिस ने Amos Noronha नाम के युवक को गिरफ्तार किया जिसे Moazzam Begg ने हिन्दू बताने की कोशिश भी की। इससे आप समझ सकते हैं यह किस हद तक अजेंडा से प्रेरित हो सकते हैं।

एक ख़ास बात यह भी है कि इसके एमनेस्टी इंटरनेशनल से ख़ास सम्बन्ध बताये जा रहे हैं। इसी एमनेस्टी इंटरनेशनल के आकार पटेल के खिलाफ FCRA (फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट) के तहत मामला भी दर्ज़ किया गया था और देश न छोड़ने देने की सीबीआई द्वारा वकालत भी की गई थी। यहाँ आप इन सभी कड़ियों को जुड़ते देख सकते हैं।

एक और महत्वपूर्ण नाम है ‘अपना मुस्लिम’। ये पाकिस्तान और उसके बाहर बैठे सारे पाकिस्तानी और मुस्लिमों का एक गिरोह है। माजिद फ़्रीमैन जैसे कट्टरपंथियों के साथ मिलकर झूठी अफवाह फ़ैलाने, और तो और इंस्टाग्राम और टिकटोक (TikTok) पर इसी ग्रुप के लोगों ने स्टेटस/वीडियोज लगाने और ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाने का काम किया। इन्हीं लोगों ने हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों पर जाकर विरोध करने के लिए भी लोगों को भड़काया।

मीडिया की भूमिका: चुनिंदा कवरेज और पक्षपाठी रिपोर्टिंग

इन घटनाओं के दौरान और इनके बाद में स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय और कई भारतीय मीडिया संस्थानों ने धड़ल्ले से सेलेक्टिव कवरेज और पक्षपाती रिपोर्टिंग की। बात करते हैं कुछ ‘द वायर’ (The Wire) जैसे भारतीय मीडिया संस्थानों की, जिन्होंने माजिद फ़्रीमैन जैसे हिंदू-घृणा से भरे कट्टरपंथियों को मंच दे दिया।

बात यहीं तक नहीं रुकी। द गॉर्डियन (The Guardian) और बीबीसी (BBC) जैसे मीडिया चैनल्स ने अपनी विश्वसनीयता के हिसाब से ही माजिद फ़्रीमैन को ‘ऐक्टिविस्ट‘ कहा है। क्या यह बात सार्वजनिक, ख़ासकर सोशल मीडिया मंचों (ट्विटर और इंस्टाग्राम) में नहीं है कि मजीद कुछ और नहीं बल्कि आतंकिवादियों का समर्थक है? माजिद शुरू से ही आतंकवाद, अल-क़ायदा और आतंकियों के लिए मुखर रहा है और इसके ट्विटर अकाउंट से यह स्पष्ट दिखता है।

जब लेस्टरशायर पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल से किसी भी तरह की मस्जिद पर हमले और हिन्दू युवकों द्वारा मुस्लिम लड़की को किडनैप करने वाली झूठी खबर का खंडन कर दिया, जो कि माजिद ने ही फैलाया और मुस्लिमो को भड़काने का काम किया था, बावजूद इन मीडिया चैनल्स द्वारा इसे ‘एक्टिविस्ट’ कहना और इन जैसे जिहादियों के घड़ियाली आंसू पोंछते हुए मंच देना कहीं से भी निष्पक्ष नहीं कहा जा सकता है।

इसके विपरीत, इन चैनल्स ने माजिद फ़्रीमैन जैसे हिन्दूफोबिक-इस्लामिस्ट्स के ही ‘नस्लीय और फ़ासिवादी हिंदू’ ‘इस्लाम से नफ़रत करने वाले BJP-RSS’, ‘जय श्रीराम हेट स्पीच’ (ध्यान देने वाली बात है घंटों सड़कों और मंदिरो के बहार गूंजते ‘नारा-ए-तकबीर’ और ‘अल्लाह-हू-अकबर’ पर किसी ने ऊँगली नहीं उठाई) के नैरटिव को ही आगे बढ़ाया और हिन्दुओं को आक्रामक/हमलावर साबित करने की कोशिश की।

हिन्दुओं और उनके मंदिरों पर किए गए हमलों पर किसी भी तरह की कवरेज नहीं की गई। दर्जनों वायरल वीडियो, जिसमें मुस्लिम खुले में हिन्दुओं को धमका रहे हैं, उस पर कोई कवरेज नहीं हुई।

‘हिंदुओं कोई ब्रिटेन से वैसे ही निकाल दो जैसे हमने कश्मीर से निकला’ जैसे नारे और धमकियों पर कोई चर्चा नहीं हुई। हिन्दुओं का पक्ष रखने वालों में से किसी को भी न डिबेट्स में बुलाया गया न ही घटनास्थल पर उनकी बातों को कवरेज दी गई।

बड़े-बड़े, नामी मीडिया चैनल्स में काम करने वाले पाकिस्तानी-इस्लामिस्ट्स और उनके पैसों पर काम करने वाले ‘रिपोर्टर्स/करेस्पोंडेंट्स/एक्सपर्ट्स’ ने भी बढ़-चढ़ के अपना ‘अमूल्य योगदान’ दिया है।

सबके ट्वीट्स में ‘RSS-BJP-HINDUTVA’ जैसे की-वर्ड भरपूर मात्रा में देखने को मिले और इन्होनें जमकर कथित ‘HindutvaForces’ पर हमले किए।

इनमें से कुछ चुनिंदा नाम Sunny Hundal (@sunny_hundal), 5Pillars(@5Pillarsuk), Amrit Wilson (@AmritWilson), Robert Carter (@Bob_cart124), Darshna Soni (@darshnasoni), Aina J. Khan (@ainajkhan), Keval Bharadia हैं।

इन सबके अलावा कई सारे भारत, पाकिस्तान, ब्रिटेन, कनाडा, US जैसे देशों के मुस्लिम संगठनों ने भी ‘HindutvaForces’ के नैरेटिव को खूब उछाला और इसी बहाने हिन्दुओं और भारत को निशाना बनाया, जिसमें IAMC (@IAMCouncil), MCB (@MuslimCouncil) etc जैसे संगठन भी शामिल थे।

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लेस्टर मामले का हासिल क्या है

अब ज़रा यह भी समझना जरुरी है कि ऐसी प्रोपगैंडा के पीछे क्या महत्वकांक्षा या उद्देश्य हो सकता है। यूँ तो हर मुद्दे की तरह इसके आसपास भी दुनियाभर के ‘कांस्पीरेसी थ्योरी’ चल रहे हैं। हम उन सभी के विचारों का उतना ही सम्मान करते हैं। हमारे भी रिसर्च बेस्ड कुछ नपे-तुले ऑब्सेर्वशन्स हैं, जिन्हें यहाँ बताना बहुत ही जरुरी है।

  • अभी ब्रिटेन की दिवंगत क्वीन एलिज़ाबेथ द्वितीय के फ्यूनरल में दुनियाभर से आए लीडर्स/डिग्निटरीज़ के सामने ‘हिंदुत्व, RSS-BJP’ को बदनाम किया जा सके।
  • हम देखते आए हैं कि USA, Britain, Canada आदि जैसे देश इन भारत-विरोधी लोगों/संगठनों के लिए एक ‘सेफ हेवन’ से कम नहीं हैं। हाल ही में अमेरीका के शहरों में हिन्दू धर्म प्रचारक साध्वी रीताम्बरा ने कुछ धार्मिक आयोजनों में भाग लिया और उनका ब्रिटेन के भी कुछ शहरों में भी धार्मिक आयोजनों में भाग लेना प्रस्तावित है।
  • इस से सारे हिन्दू-विरोधी संगठनों को भय है कि एक-दो दशकों में जिस प्रकार हिन्दू-पुनर्जागरण और अपनी धर्म-सभ्यता-संस्कृति को बचाने के लिए किए गए प्रतिरोध, जो मुख्यतः भारत तक ही सीमित रहा है, अब वह प्रतिरोध यहाँ इन देशों में भी न झेलना पड़ जाए। यही वजह है कि सुनियोजित तरीके से ब्रिटेन में माहौल ख़राब किया गया, जिससे प्रशासन द्वारा इन आयोजनों को रद्द कर दिया जाए।

पाकिस्तान के अभी जो हालात हैं, वह किसी भी तरह के ‘कन्वेंशनल वॉर’ भारत के ख़िलाफ़ नहीं कर सकता, तो ऐसे में मजहब की ही एक ऐसी जगह बचती है जिस पर सारे मुस्लिमों को जोड़कर हिंदुत्व/RSS/BJP के नाम पर ज्यादा से ज्यादा ‘एंटी-इंडिया’ माहौल बनाया जा सके और RSS पर प्रतिबंधित आरोपित करने के प्रयास की जा सकें। आपको याद हो तो ऐसे ही लॉबिंग वर्ष 2014 से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ भी की गई थी।

जिस हिसाब से इन पश्चिमी देशों में मुस्लिम चरमपंथियों का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है, आने वाले वर्षों में यह भीड़ बहुत कुछ हथियाने जा रही है। ऐसे में, कोई और इस ‘मास्टरप्लान’ को चैलेंज ना कर सके, इसके लिए सम्भवतः यह जरुरी मान लिया गया हो कि उन सभी ‘पोटेंशियल बैरियर्स’ (जिसमें इंडियन डायस्पोरा एक बड़ा मुद्दा है) को जितनी निर्दयता से हो सके, समाप्त कर दिया जाए।

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