फ़रवरी 2, 2023 12:41 पूर्वाह्न

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मोढेरा बनेगा देश का पहला सौर-ऊर्जा संचालित गाँव

गुजरात के मोढेरा को प्रधानमंत्री 9 अक्टूबर, 2022 को देश का पहला सौर ऊर्जा से संचालित गाँव घोषित करने जा रहे हैं।

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मोढेरा देश का पहला सौर ऊर्जा संचालित गाँव, ऊर्जा सुरक्षा की ओर एक ओर कदम

प्रधानमंत्री मोदी 9 अक्टूबर, 2022 को गुजरात में सूर्य मंदिर के लिए प्रसिद्ध मोढेरा को देश का पहला सौर ऊर्जा से संचालित गाँव घोषित करने वाले हैं।यह नवीकरणीय ऊर्जा या रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में एक बड़ा कदम होगा। इसके साथ ही मोढेरा के सूर्य मंदिर में पीएम मोदी 3D प्रोजेक्ट का भी शुभारंभ करेंगे, जिससे यहाँ आने वाले पर्यटकों को इतिहास की जानकारी मिल सके। 

सौर परियोजना के तहत घरों में 1,000 से ज्यादा सौर पैनल लगाए गए हैं, जो 24 घंटे बिजली उत्पादन की क्षमता रखते हैं। मोढेरा को सौर ऊर्जा से संचालित गाँव बनाने की परियोजना पर 2019 से राज्य और केंद्र सरकार ने मिल कर काम किया है। इसमें दो चरणों में 80.66 करोड़ रुपए की लागत से पूरा काम हुआ है।

परियोजना के तहत मोढेरा से 6 किमी दूर स्थित मेहसाणा जिले की सुजानपुर गाँव में 12 हेक्टेयर जमीन पर 6MW के सोलर ऊर्जा योजना और 15MW के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लगाए गए हैं। 

मोढेरा सूर्य मंदिर के पास ही BESS के साथ 50 किलोवाट सौर आधारित इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग और पार्किंग इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधा स्थापित की गई है। गाँव वालों को सरकार द्वारा मुफ्त सौर ऊर्जा उपलब्ध करवाई जाएगी। 

जलवायु परिवर्तन के खतरे को भांपते हुए मोदी सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नए लक्ष्य निर्धारित किए हैं और अक्षय ऊर्जा, पवन ऊर्जा परियोजनाएं इसी का हिस्सा है। हालाँकि, वैश्विक स्तर पर अमेरीका और चीन ग्रीन हाउस गैसों के सबसे बड़े उत्पादक हैं लेकिन, विदेशी मीडिया द्वारा इस मुद्दे पर शायद ही कभी ध्यान खींचा गया है।

वर्ष 2015 में पेरिस में जलवायु परिवर्तन को लेकर आयोजित हुए COP-21 सम्मेलन में भारत ने 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंंधन आधारित संसाधनों से 40 प्रतिशत विद्युत  क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा था।

वहीं ग्लासगो में हुए COP-26 में लक्ष्य को पुनर्निर्धारित करते हुए पीएम मोदी ने गैर-जीवाश्म ईंंधन आधारित संसाधनों से ऊर्जा प्राप्त करने के लक्ष्य को 50 प्रतिशत तक कर दिया। इसी सम्मेलन में पीएम मोदी द्वारा 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन वाले देश बनने की घोषणा की थी। 

जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक में भारत की स्थिति बेहतर नजर आती है। हरित गैसों को प्रभाव कम करने के लिए भारत की ओर से बड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। यूनाइटेड नेशन में भारत ने 2030 तक 450 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है ताकि हरित गैसों के प्रभाव से मुक्ति मिल  सके। 

चीन में 2018 से ही ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन का आँकड़ा बढ़ता जा रहा है, लेकिन मीडिया द्वारा जिम्मेदारों का नामकरण करने के बजाय इसकी प्रासंगिकता को ही गौण कर दिया जाता है। 

भारत का ग्रीन हाउस गैसों का प्रति व्यक्ति उत्पादन दर विकसित देशों की तुलना में काफी कम है। मोदी सरकार द्वारा इसे ओर भी कम करने और देश को नवीकरणीय ऊर्जा की ओर मोड़ने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं। 

पीएम-कुसुम यानी प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्तम महाअभियान के जरिए किसानों को पानी और ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करके अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

सोलर पार्क योजना में सोलर पार्क और अल्ट्रा मेगा सोलर पावर प्रोजेक्ट के विकास के लिए योजना बनाई गई है। इसमें अभी तक 40 सौर उद्यानों को 15 राज्यों में 26.3 गीगावॉट की कुल क्षमता के साथ मंजूरी दे दी गई है। 

गुजरात के कच्छ में देश का सबसे बड़ा सोलर पार्क बनने जा रहा है। वहीं, तेलंगाना के पेद्दापल्ली जिले के रामागुंडम में NTPC द्वारा देश का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट विकसित किया जा रहा है। 

ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने से देश को आत्मनिर्भरता के लक्ष्य का प्राप्त करने में सहयोग मिलेगा। ऊर्जा सुरक्षा को उपलब्धता, पहुँच और वहनीयता से परिभाषित किया जा सकता है। दीर्घकालिक ऊर्जा से आर्थिक विकास और पर्यावरणीय जरूरतों को पूरा करने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

नवीकरणीय ऊर्जा से धारणीय विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है। यह स्थायी विकास लक्ष्य या सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (SDG)-7 ‘स्वच्छ एवं वहनीय ऊर्जा’ के अनुकूल है। नवीकरणीय ऊर्जा में सौर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, जल ऊर्जा, बायोमास ऊर्जा शामिल होती है।

SDG-7 के तहत ही भारत सरकार देश में इलेक्ट्रिक ह्वीकल को बढ़ावा दे रही है। साथ ही, बायोफ्यूल और कंप्रेस्ड बायोगैस को प्राथमिकता दी जा रही है। 

वर्ष 2018 में राष्ट्रीय पवन सौर हाइब्रिड नीति की घोषणा की गई। शैल गैस, कोल बेड मीथेन जैसे गैर-परंपरागत हाइडोकार्बन की खोज और दोहन के लिए हाइडोकार्ब एक्सप्लोरेसन एवं लाइसेंसिंग पॉलिसी (HELP) की शुरुआत की गई। 

राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन, प्रयास (PRAYAS), कुसुम (KUSUM), सोलर रुफ टॉप योजना, सौर रक्षा जैसी कई योजनाओं का शुभारंभ किया गया है। नीति आयोग द्वारा इंडिया एनर्जी सिक्योरिटी सेनेरियो-2047 की शुरुआत की गई।

देश के पास पवन ऊर्जा के क्षेत्र में 695 गीगावॉट की क्षमता है, जिसकी ऊँचाई 120 मीटर है। वहीं सौर ऊर्जा में देश की अनुमानित क्षमता 750 गीगावॉट है। अपनी इन्हीं क्षमताओं और परियोजनाओं  के सही क्रियान्वयन से देश ना सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत को वैश्विक नेता बनने में भी मदद करेगा। 

Pratibha Sharma
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