फ़रवरी 4, 2023 2:43 अपराह्न

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जम्मू-कश्मीरः हालात सुधरे तो टूरिज्म खासकर धार्मिक पर्यटन में आया उछाल

जम्मू कश्मीर में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। माता वैष्णो देवी के दर्शन करने आ रहे श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है।

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जम्मू कश्मीर में धार्मिक पर्यटन को मिल रहा बढ़ावा

देशभर में माँ के मंदिरों में नवरात्रि का उल्लास जारी है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन भी केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई-नई योजनाएं लेकर आ रहा है। नवरात्रि के दौरान तीर्थयात्रियों के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन विशेष पैकेज जारी कर रहा है। ये योजनाएं यात्रियों के प्रवास को राज्य में बढ़ाने के लिए शुरू की जा रही है। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। 

जम्मू कश्मीर में हिंदुओं के दो मुख्य पवित्र स्थल मौजूद हैं, जम्मू में माँ वैष्णो देवी और कश्मीर में अमरनाथ। दोनों स्थलों पर हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। नवरात्रि के दिनों में माँ वैष्णो देवी के मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें दिखाई देती हैं।

हालाँकि, श्रद्धालु यहाँ लंबा समय ना बिताकर 2-3 दिन ही रहते हैं। इसलिए, प्रशासन लुभावनी योजनाओं और कार्यक्रमों के जरिए प्रदेश में इनके प्रवास के समय को बढ़ाना चाह रहा है। 

इन योजनाओं में प्रशासन ने ‘माता की चौकी’ कार्यक्रम जारी किया है, जिसमें माँ के भजन गाए जाते हैं। श्रद्धालुओं के लिए रामलीला का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें प्रभात फेरी निकाली जा रही है। प्रभात फेरी में कलाकार सुबह-सुबह धार्मिक रैली निकालते हैं। 

‘माता की कहानी’ कार्यक्रम के जरिए माँ की कहानियाँ सुनाई जाती है। शिव-पार्वती को सजाकर लोक नृत्यों के साथ झाँकी निकाली जाती है। लेजर-लाइट शो, गरबा कार्यक्रम, भजन प्रतियोगिताएं और धार्मिक स्थलों के साथ जम्मू कश्मीर के अन्य स्थलों को पैकेज में शामिल किया गया है। 

धार्मिक स्थल तक पहुँचने के लिए शुल्क मुक्त बैटरी चलित गाड़ियाँ और घोड़े उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। साथ ही दर्शन में दिव्यांगों को प्राथमिकता दी जा रही है। जम्मू कश्मीर में तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए टैंटों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। जहाँ 2018 में इनकी संख्या 29,000 थी, वहीं आज यहाँ 70,000 टैंट की सुविधा उपलब्ध है। 

हाल ही में, मिशन यूथ के तहत पर्यटन गांव विकास कार्यक्रम (TVDP) की शुरुआत की गई थी। इस योजना में प्राकृतिक सुंदरता, कला-सांस्कृतिक, इतिहास और पुरातत्व से जुड़े 181 गाँवों को विकसित किया जा रहा है। इन गाँवों में बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा। 

सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक इसका आधार रहेंगे, जिससे प्रदेश में पर्यटन को तो बढ़ावा मिलेगा ही साथ ही, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। जिन युवाओं को पर्यटन के क्षेत्र  में रोजगार स्थापित करना है उनको 10 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। लोन को चुकाने के लिए भी 3.5 लाख रुपए की विशेष सब्सिडी भी दी जाएगी। 

धारा 370 के उन्मूलन और कोरोना संकट से जम्मू-कश्मीर के पर्यटन को उभारने के लिए सरकार कई योजनाएं लागू कर रही है। इसके लिए मोदी सरकार ने भी राज्य के लिए बजट जारी किया है। 

इसी का परिणाम है कि 2022 में प्रदेश के पर्यटन में भारी उछाल देखा जा रहा है। गृह मंत्रालय के अनुसार, जुलाई 2022 तक जम्मू कश्मीर में 1.05 करोड़ पर्यटक घाटी के मनोरम दृश्यों का आनंद उठाने पहुँचे हैं। 2020 में यह आंकड़ा मात्र 41,267 था। 

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय निवासियों को आर्थिक सुरक्षा मिली है। साथ ही, प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलने से निवेश में भी बढ़ोतरी हुई है। जम्मू कश्मीर में हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों में 248 करोड़ तक का निवेश निजी क्षेत्र से किया गया है।

2020 के बाद से ही पर्यटन विभाग ने क्षेत्र  में कई तरह की योजनाएं और निवेश को बढ़ावा दिया है। इसी का सीधा फायदा स्थानीय रोजगार और आर्थिक विकास में देखा जा सकता है।

Pratibha Sharma
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