सितम्बर 26, 2022 7:10 अपराह्न

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ओणम का मतलब पवित्रता का त्योहार होना है, जबरन सम्मिलन की कला नहीं

पवित्र हिंदू त्योहारों की ‘अपनी परिभाषा’ पेश करना वामपंथियों और सोशल मीडिया पर उपस्थित कथित बुद्धिजीवियों का पंसदीदा विषय है। ऐसा ही कुछ ओनम त्योहार के साथ हो रहा है।

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ओणम का मतलब पवित्रता का त्योहार होना है, जबरन सम्मिलन की कला नहीं

पवित्र हिंदू त्योहारों की ‘अपनी परिभाषा’ पेश करना वामपंथियों और सोशल मीडिया पर उपस्थित कथित बुद्धिजीवियों का पंसदीदा विषय है। हाल ही में, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो गया जिसमें, केरल के एक स्कूल में, हिजाब पहने हुई एक लड़की ओणम पर नाचती हुई नजर आ रही है। राजनेताओं से लेकर कई लोगों ने वीडियो की सराहना की लेकिन, टाइम्स नाउ वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक मौलवियों ने इसपर आपत्ति जताई है। 

सदियों से मनाए जा रहे भारत के त्योहारों में धर्म, विविधता, और संस्कृति की झलक दिखाई देती है. ऐसे ही केरल में मनाया जाने वाला त्योहार ओणम, मौसम की पहली फसल का जश्न मनाने का त्योहार है। ओणम के लिए पूरा परिवार सप्ताह भर तक चलने वाले उत्सव में पूजा, परंपराओं, नाच-गाने को उत्साह के साथ मनाता है। ओणम में विशेष तौर पर धार्मिक ग्रंथ और पौराणिक कथाओं का वर्णन होता है।

ओणम की कथा

ओणम को लेकर सबसे प्रचलित कथा राजा महाबली और भगवान विष्णु के वामन अवतार की है। ओणम, असुरों के राजा महाबली की याद में मनाया जाता है, जो अपनी प्रजा से मिलने हर वर्ष केरल आते हैं

  • पौराणिक कथा के अनुसार, राजा महाबली विष्णु के परम भक्त थे। भगवान विष्णु ब्राह्मण का वेष लेकर राजा महाबली की परीक्षा लेने धरती पर आए थे। 
  • जब तीनों जगत जीतने कि लिए राजा महाबली ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया तो भगवान विष्णु वामन अवतार में अवतरित होकर दक्षिणा मांगने पहुँच गए।
  • राजा महाबली की परीक्षा ली गई तो वे अपनी भक्ति साबित करने में सफल रहे। वामन अवतार ने परीक्षा लेने के बाद राजा महाबली को आशीर्वाद और मोक्ष प्रदान करने के लिए उनके सिर पर पैर रखा था।

इसके बाद राजा महाबलि ने वामन अवतार से प्रार्थना की थी कि वो अपने वास्तविक रूप के दर्शन करवाएं। इसके बाद उन्हें पता चला कि यह असाधारण ब्राह्मण स्वयं भगवान विष्णु हैं तो उन्होंने उनसे प्रार्थना की ताकि वह हर वर्ष एक बार केरल जाकर अपनी प्रजा से मिल सकें।

वामपंथ का असर

  • वर्षों से चले आ रही इस कथा को वामपंथियों ने अपना रंग देते हुए इसे जाति व्यवस्था से जोड़ दिया।
  • उनकी यह नासमझी सिर्फ वामन अवतार के लिए नहीं है क्योंकि वह ब्राह्मण हैं, बल्कि ओणम से पवित्रता और हिंदू धार्मिक ग्रंथों को हटाने को लेकर भी हैं, जिसमें वो यह तक भूल जाते हैं कि राजा महाबली भगवान विष्णु के भक्त थे।
  • ओणम को लेकर और भी विवाद खड़े किए जाते हैं।

जहाँ एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में कोट्टायम में एक महिला शिक्षक के ओणम के संबोधन पर हिन्दू ऐक्य वेदी ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद उसे माफी माँगनी पड़ी थी। 2016 में ‘द वायर’ की रिपोर्ट में दावा किया गया कि वामन जयंती पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की शुभकामनाओं ने लोगों और यहाँ तक की राज्य के सीएम तक को उनकी आलोचना का बहाना दिया था। 

दरअसल, अमित शाह ने ट्विटर पर ओणम की बधाई देते हुए एक फोटो शेयर की थी जिसमें वामन अवतार राजा महाबली के सिर पर पैर रखे हुए नजर आ रहे थे। अमित शाह के बधाई संदेश पर एक बार फिर 2018 में समान विवाद देखने को मिला था जब 2018 की एक रिपोर्ट में बताया गया कि

 “केरल के राष्ट्रीय त्योहार ओणम की पूर्व संध्या पर वामन जयंती की बधाई देने और जो पर्व मानव जाति की समानता का जश्न मनाता है उसका ‘ब्राह्मणीकरण’ करने के लिए मलयाली लोगों द्वारा अमित शाह को एक बार फिर ट्रोल किया जा रहा है” 

2022 में परिदृश्य बदल गया है, वामपंथी ज्यादा चालाक हो गए हैं। वे ओणम से हिंदू प्रतीकों को हटाने के बजाय अब सभी मजहबों को मिलाकर दिखाते हैं। इसे वे धार्मिक सौहार्द बनाना कहते हैं। 

समस्या तब खड़ी होती है जब वामपंथियों द्वारा हिंदू धार्मिक प्रतीकों, ग्रंथों को हटाकर पवित्रता की नई परिभाषा गढ़ी जाती है। यहाँ यह सवाल खड़ा होता है कि ऐसे परिवेश में ओणम का भविष्य कैसा होगा और इसे आगे कौन गढ़ेंगे? 

The Indian Affairs Staff
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