फ़रवरी 4, 2023 1:30 अपराह्न

Category

UN में गूंजे PM मोदी के 5 प्रण: विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा- भारत शांति का पक्षधर

लगभग 17 मिनट लम्बे इस वक्तव्य में जयशंकर ने भारत की G-20 अध्यक्षता और आतंकवाद के प्रति जीरो टालरेंस पॉलिसी के बारे में भी बात की।

1893
5min Read
JAISHANKAR

न्यूयॉर्क में चल रही संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भारत के विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर ने मजबूती से भारत का पक्ष रखा है। प्रधानमंत्री के ‘पञ्च प्रण’, कोरोना काल में भारत के द्वारा विश्व को दी गई मदद और आतंकवाद जैसे मुद्दों को जयशंकर ने महासभा के सामने प्रमुखता से रखा।

संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने जाते जयशंकर साभार: रुचिरा कम्बोज

10 दिवसीय अमेरिकी यात्रा पर गए हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने महासभा के सामने भारत का पक्ष रखते हुए रूस यूक्रेन युद्ध, खाद्य सुरक्षा, आर्थिक संकट में फंसे श्रीलंका की सहायता, पर्यावरण जैसे मुद्दों पर बात की। लगभग 17 मिनट लम्बे इस वक्तव्य में जयशंकर ने भारत की G-20 अध्यक्षता और आतंकवाद के प्रति जीरो टालरेंस पॉलिसी के बारे में भी बात की।

पञ्चप्रणों का जिक्र, सदैव संकट में साथ खड़ा रहा भारत

विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने भाषण का प्रारम्भ भारत के स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने पर आजादी का अमृत महोत्सव के बारे में बताने से किया। आगे उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर अगले 25 साल में भारत को विकसित बनाने के लिए बताए गए पञ्च प्रणों के बारे में विश्व को अवगत कराया।

विदेश मंत्री ने अगले 25 साल में भारत को विकसित बनाने के प्रण, औपनिवेशिक चिन्हों को खत्म करने, अपनी महान सभ्यता को संरक्षित करने तथा महामारी और आतंकवाद से लड़ने के लिए एकता व अखंडता को बढ़ावा देने एवं नागरिकों के कर्तव्यों को बढ़ावा देने के बारे में विश्व को बताया।

उन्होंने कहा देश के भले के साथ विश्व का भला भी किया जा सकता है, हमने इसका उदहारण विश्व के 100 देशों से ज्यादा को वैक्सीन देकर दिखाया है। हमने संकट के समय में मात्र अपने ही नहीं अन्य देशों के नागरिकों को भी संकटग्रस्त क्षेत्रों से निकाला। हम पूरे विश्व के साथ केवल शब्दों में ही एकजुटता नहीं दिखाते, इसको असल रूप में हमारे द्वारा पूरे विश्व में चलाए जा रहे 700 प्रोजक्ट में देख सकते हैं।

यूक्रेन युद्ध में हम शांति की तरफ, विश्व की स्थिति चिंताजनक

जयशंकर ने कोरोना महामारी के बाद से विश्व की स्थिति में गिरावट की बात की, उन्होंने विश्व में बढ़ते कर्जों, यूक्रेन युद्ध के बाद से खाद्य सामग्री, ऊर्जा और उर्वरकों में आई कमी को विश्व के सामने रखा।

जयशंकर ने विश्व के दक्षिणी ध्रुव में बसे देशों को इन सब समस्याओं से सबसे अधिक पीड़ित बताया, उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोरोना महामारी से सर्वाधिक यही देश पीड़ित हुए थे, उसी प्रकार वर्तमान समस्याओं से भी यही सबसे अधिक पीड़ित होंगे।

साभार: सिद्धांत सिबल

रूस-यूक्रेन संघर्ष में भारत की स्थिति को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि हमसे अक्सर पूछा जाता है कि हम किस पक्ष के साथ हैं, मैं यह विश्व को बताना चाहता हूँ हम सदैव शान्ति के साथ हैं और रहेंगे। हम उस पक्ष के साथ हैं संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों और चार्टर को मानता है।

साभार: सिद्धांत सिबल

हम उन देशों के साथ खड़े हैं जो इस संघर्ष की वजह से अपनी जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। अतः यह हमारा साझा हित है कि इस समस्या को जल्द हल करने का प्रयास संयुक्त राष्ट्र और उसके बाहर करें।

भारत द्वारा पहुंचाई गई मदद का जिक्र, पर्यावरण पर बात

इसके आगे एस जयशंकर ने भारत के द्वारा अपने संकट ग्रस्त पड़ोसियों को पहुंचाई गई मदद के बारे में महासभा को बताया, उन्होंने कहा, यूक्रेन संघर्ष के अलावा भारत अपने आस-पास में भी चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में विश्व समुदाय को अपने संकीर्ण हितों से ऊपर उठना चाहिए, भारत ने ऐसा ही किया है।

उन्होंने कहा कि हमने 50,000 टन चावल अफगानिस्तान को, 3.8 बिलियन डॉलर से ज्यादा के कर्जे श्रीलंका को उसकी खाद, व्यापार और ईंधन जरूरतों को पूरा करने के लिए और दस हजार टन से ज्यादा की खाद्य सामग्री और वैक्सीन म्यांमार को पहुंचाई हैं।

साभार: सिद्धांत सिबल

पर्यावरण के बारे में बात करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत ने सोलर गठबंधन में एक सूर्य-एक ग्रिड-एक विश्व के लक्ष्य की तरफ काफी काम किया है, उन्होंने कहा कि भारत पर्यावरण संरक्षण के हर प्रयास के साथ है। हम पेरिस समझौते के साथ भी मजबूती से खड़े हैं।

आतंकवाद और G-20 का उल्लेख

जयशंकर ने अपने भाषण में भारत की G-20 अध्यक्षता के बारे में बात करते हुए बताया कि हम अपनी अध्यक्षता के दौरान विकासशील देशों की चुनौतियों के प्रति गंभीर हैं। हम इस दौरान देशों के खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, बढ़ते कर्जे के मुद्दों और आर्थिक तरक्की के विषयों के प्रति एक सेतु का काम किया है।

हम आतंकवाद विरोधी कमेटी की अपनी अध्यक्षता के दौरान भारत दिल्ली और मुंबई में विशेष बैठक का आयोजन करेंगे, हम सभी सदस्य देशों को इसमें आमंत्रित करते हैं। उन्होंने भारत के द्वारा आतंकवाद पर जीरो टालरेंस पॉलिसी का जिक्र किया।

साभार: सिद्धांत सिबल

उन्होंने चीन के द्वारा लगातार आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र के द्वारा प्रतिबंधों से बचाने की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ऐसा करके देश न अपना भला करते हैं ना ही किसी दूसरे का। जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा महासभा में बदलाव का मुद्दा भी उठाया।

साभार: सिद्धांत सिबल

जयशंकर ने प्रधानमंत्री मोदी के रूस के राष्ट्रपति पुतिन से कही गई बात ‘इट्स नॉट एरा ऑफ वार’ का संदर्भ देते हुए कहा कि यह समय युद्ध या संघर्ष का नहीं बल्कि विकास और सहयोग का समय है। जयशंकर के भाषण के दौरान ध्यान देने वाली बात रही कि उन्होंने के बार भी पाकिस्तान का जिक्र नहीं किया, उन्होंने अपने भाषण का केंद्र पर्यावरण, आतंकवाद, यूक्रेन संघर्ष और बदलाव को बनाया।

The Indian Affairs Staff
The Indian Affairs Staff
All Posts

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Recent Posts

Popular Posts

Video Posts