सितम्बर 27, 2022 6:52 पूर्वाह्न

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त्रिपोली में भड़की हिंसा दे रही है लीबिया में गृहयुद्ध के संकेत

त्रिपोली में राजनीतिक गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प में 23 लोग मारे गए हैं और 87 घायल हो गए हैं।
2011 में अमेरिका ने पलटी थी लीबिया की सत्ता।

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Tripoli Libya त्रिपोली लीबिया

त्रिपोली में शनिवार को सड़क पर विरोधी राजनीतिक गुटों के बीच हुई लड़ाई में कम से कम 32 लोग मारे गए हैं और 159 घायल हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया है। अमेरिकी राजदूत रिचर्ड नोरलैंड ने विरोधी दलों से ‘चीजें खराब होने से पहले’ जल्द चुनावों की तारीख पर सहमति बनाने और हिंसक तनाव कम करने की अपील की है।

अमेरिका ने पलटी थी लीबिया की सत्ता

हालांकि वर्ष 2011 में हिलेरी क्लिंटन और बराक ओबामा द्वारा नाटो के साथ मिलकर लीबिया में गद्दाफी की सत्ता पलटने के बाद से ही तनावपूर्ण माहौल रहा है। दो साल पहले सरकार और विद्रोही गुटों के बीच हुए समझौते के कारण पिछले दो साल अपेक्षाकृत शांत रहे हैं।

यह अल्पकालिक शांति शनिवार को समाप्त हो गई क्योंकि लड़ाकों ने छोटे हथियारों, भारी मशीनगनों, मोर्टार और अन्य भारी हथियारों से गोलीबारी कर देश की राजधानी को हिला दिया। त्रिपोली के विभिन्न सेक्टरों में हुए विस्फोटों से आसमान में धुआं फैल गया।

27 अगस्त, 2022 को राजधानी त्रिपोली में विरोधी गुटों की बमबारी से आसमान धुंए से भर गया। फ़ोटो क्रेडिट: वीओए

लीबिया में क्यों हो रही लड़ाई

गौरतलब है कि दो राजनीतिक समूह लीबिया पर शासन करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं: अब्दुलहमीद अल-दबीबाह के नेतृत्व वाली ‘गवर्नमेंट ऑफ़ नेशनल यूनिटी’ (जीएनयू), और, एक विरोधी समूह, जिसका नेतृत्व पूर्व आंतरिक मंत्री फाति बाशागा कर रहे हैं। बाशागा को लीबिया की पूर्वी संसद का समर्थन प्राप्त है, जो टोब्रुक में स्थित है। संक्षेप में कहें तो, यह दो प्रतिद्वंद्वी प्रधानमंत्रियों और दो प्रतिद्वंद्वी सरकारों की लड़ाई है।

दोनों ही गुटों को पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त है, और ये अधिक से अधिक तेल के कुंओं पर कब्जा जमाना चाहते हैं। वर्तमान लड़ाई का एक कारण वह तेल का कुआँ भी है जो कि राजधानी त्रिपोली से कुछ ही दूर स्थित है। रूस यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोप और शेष पश्चिम फ़िल्हाल गंभीर तेल संकट से जूझ रहा है और महंगाई चरम पर पहुँच चुकी है, ऐसे में इस अचानक विद्रोह में यूरोपीय शक्तियों के निहित स्वार्थों से इंकार नहीं किया जा सकता है।

लीबिया अफ्रीका का चौथा सबसे बड़ा देश है, जहाँ विपुल तेल भण्डार मौजूद हैं। इसका ज्यादातर इलाका रेगिस्तानी है और बहुसंख्य आबादी मुसलमान है। 42 सालों तक इस देश पर कर्नल मुअम्मर गद्दाफ़ी का तानाशाही शासन हुआ पर 2011 में भड़के जनविद्रोह के दौरान एक संदिग्ध सैन्य हमले में गद्दाफी की मौत हो गयी। उसके बाद से ही लीबिया विदेशी शक्तियों के प्रभाव में अराजकता से जूझता रहा है।

पूरा घटनाक्रम

सऊदी अल-अरबिया टीवी का हवाला देते हुए, वीओए ने बताया:

इस साल की शुरुआत में देश की पूर्वी संसद द्वारा नामित आगामी प्रधानमंत्री फाति बाशागा, ने निवर्तमान प्रधान मंत्री अब्दुलहमीद दबीबा को ‘राजधानी छोड़ने” के लिए कहा, तो दबीबा ने जवाब दिया कि वह ‘देश के मामलों से निपटने में बहुत व्यस्त हैं।’

पिछले हफ्ते, बाशागा ने ‘लीबिया के प्रमुख लोगों’ से आग्रह किया था कि वे दबीबा की ‘नाजायज’ सरकार से अपना समर्थन वापस ले लें। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता के बाद पिछले साल प्रधानमन्त्री पद पर नियुक्त हुए दबीबाह ने घोषणा की है कि जब तक चुनाव नहीं हो जाते तब तक वह सत्ता नहीं छोड़ेंगे।

शनिवार को हिंसक लड़ाई उस समय शुरू हुई जब जीएनयू के सैन्यबल ने बाशाघा समर्थित सैन्यबल को चुनौती दी। रॉयटर्स ने बताया कि शनिवार की दोपहर में, त्रिपोली शहर में तीन दिशाओं से मिलिशिया बल घुसे चले आ रहे थे। एक चश्मदीद ने कहा कि एक काफिले में 300 वाहन थे, लेकिन वह वापस अपने मिसराता बेस की ओर मुड़ गया था।

यह लड़ाई त्रिपोली शहर के घनी आबादी वाले, तीन वर्ग किलोमीटर के दायरे में हुई है। नागरिक आबादी वाले इलाकों में अंधाधुंध गोलाबारी से दहशत फ़ैल गयी और अस्पताल घायलों से भर गए। लीबिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक मरने वालों में 17 नागरिक हैं। इस बीच विद्रोहियों ने शहर के 6 अस्पतालों पर भी हमला कर दिया।

इस हिंसक झगड़े के कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं, हालांकि हम उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सकते हैं:

Mudit Agrawal
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